वृंदावन। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार को समान शिक्षा नीति एवं समान नागरिक संहिता काे लागू करना चाहिए। सरकार उन पांच लाख मंदिरों को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त करे, जिनका धन इसाई मिशनरियों और इस्लामिक ताकतों के पोषण के लिए काम लिया जाता है।
यह विचार उन्होंने स्वामी वामदेव महाराज के शताब्दी आनंद महोत्सव में रविवार को व्यक्त किए। वामदेव महाराज ज्योर्तिमठ में देशभर से पहुंचे संतों ने सामाजिक अखंडता, राष्ट्र जागरण एवं हिंदू एकता पर चिंतन मनन किया। स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि गुरुकुल पद्धति से ही देश की शिक्षा, संस्कार, चिकित्सा एवं धर्म का संरक्षण होगा। केंद्रीय मंत्री महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि जब देश और समाज ने पुकारा तो स्वामी वामदेव महाराज कंदराओं से निकलकर रामकाज में लग गए। विहिप ने जब निवेदन किया तो अपनी त्याग, तपस्या, विद्या अध्ययन, अध्यापन छोड़कर राष्ट्र कार्य में लग गए।
जगद्गुरु निंबार्काचार्य श्यामशरण देवाचार्य महाराज ने कहा कि जब उनके गुरुदेव ने उन्हें निंबार्क पीठ की सेवा में नियुक्त किया तब हुए महोत्सव की अध्यक्षता स्वामी वामदेव महाराज ने की थी। हनुमान गढ़ी के गौरीशंकर दास महाराज ने कहा कि स्वामीजी ने राष्ट्र रक्षा, धर्म रक्षा, गोरक्षा का जो बीड़ा उठाया था, उसमें संत समाज आज भी लगा हुआ है। कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने कहा कि वे साधुता, पवित्रता, मानवता की प्रतिमूर्ति थे। स्वामी अभिषेक चैतन्य गिरि महाराज ने कहा कि देश विपरीत विचारधाराओं के आधीन है। कमलनयन दास महाराज ने कहा कि राष्ट्र ही हमारा धर्म, कर्म और उपासना है। इससे पूर्व स्वामी वामदेव महाराज द्वारा लिखित चार ग्रंथों का विमोचन किया गया।
निर्मल पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानदेव सिंह, अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर प्रज्ञानानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर दिव्यानंद पुरी, स्वामी मुक्तानंद पुरी, महामंडलेश्वर अवशेष चैतन्य महाराज, शांतिस्वरुपानंद गिरि, महामंडलेश्वर प्रणवानंद महाराज, महामंडलेश्वर भगवत्स्वरुप, महामंडलेश्वर जगदीश पुरी, स्वामी ज्ञानानंद आदि ने स्वामी वामदेव महाराज के प्रति भावांजलि व्यक्त की।