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Mathura News: 5 लाख की आबादी पर कहर, पानी के साथ पी रही जहर

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मथुरा। ग्रामीण आंचल में 5 लाख की आबादी भूमिगत जल के साथ बीमारियों का सेवन कर रही है। इन क्षेत्रों से लिए गए नमूनों की जांच में आयरन के साथ टीडीएस की मात्र मानक से कहीं अधिक पाई गई है। जल निगम ने बीते दिनों इन क्षेत्रों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (सीडब्ल्यूएपी) स्थापित करने के लिए भेजे प्रस्ताव में इसका जिक्र किया है।
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जल निगम ने शासन को भेजे पत्र में कहा कि नगरीय व कस्बाई क्षेत्र कोसीकलां, छाता, चौमुंहा, बरसाना, सौंख, बलदेव, गोकुल, राधाकुंड, बाजना, गोवर्धन और राया में करीब 5 लाख की आबादी निवास करती है। यहां भूमिगत जल पीने योग्य नहीं है। अधिकारियों का दावा कि इन क्षेत्रों के भूमिगत जल की जांच में पानी में टीडीएस की मात्रा दो हजार से अधिक मिली है जबकि डब्ल्यूएचओ के अनुसार पीने योग्य पानी में टीडीएस की मात्रा 300 तक श्रेष्ठ मानी गई है।
यहां पानी में आयरन की मात्रा भी मानक से अधिक मिली है। पीने योग्य पानी में आयरन की मात्रा आमतौर पर 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर या इससे कम होनी चाहिए, जांच में पानी में आयरन दोगुना से अधिक मिलने का दावा किया है। इसी को आधार बनाकर जल निगम के अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है ताकि इन क्षेत्रों के लोगों को मीठा पानी मिल सके। अधिकारियों का कहना कि इन क्षेत्रों में भूमिगत जल की जांच में आयरन व टीडीएस की मात्रा अधिक मिलने पर पानी के अन्य तत्वों की जांच नहीं हो सकी है। पानी के नमूने पहले स्तर पर फेल माने गए हैं। इसलिए अन्य तत्वों की जांच की संभावना खत्म हो जाती है।
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355.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा
जल निगम ने इन क्षेत्रों में सीडब्ल्यूएपी स्थापति करने के लिए करीब 355.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें से नंदगांव, महावन, बलदेव और फरह में सीडब्ल्यूएपी स्थापित करने की मंजूरी मिल गई है। वहीं कोसीकलां, छाता, चौमुंहा, बरसाना, सौंख, बलदेव, गोकुल, राधाकुंड, बाजना, गोवर्धन और राया में प्लांट लगाने की मंजूरी नहीं मिली है।

इन बीमारियों का हो सकते हैं शिकार
सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि पानी में टीडीएस की अधिक मात्रा लोगों को बीमार बनाती है। अधिक टीडीएस वाले पानी का सेवन करने से किडनी पर असर, पाचन संबंधी समस्याएं, पेट में जलन, उच्च रक्तचाप, त्वचा और बालों की समस्याएं हो सकती हैं। यदि टीडीएस में आर्सेनिक, लेड, फ्लोराइड, नाइट्रेट जैसे तत्व मानक से अधिक हों तो शरीर को गंभीर जोखिम उठाना पड़ सकता है।

चार नगर पंचायतों में सीडब्ल्यूएपी स्थापित करने की मंजूरी मिल गई है। वहीं अन्य 10 कस्बाें में प्लांट स्थापित करने की स्वीकृति अपेक्षित है। इन क्षेत्रों के भूमिगत जल में टीडीएस व आयरन की मात्रा मानक से अधिक पाई गई है। इसलिए इन क्षेत्रों में जल शोधन संयंत्र स्थापित कराए जाएंगे ताकि क्षेत्र के लोगों को मीठा पानी मिल सके।
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विशाल सिंह, एक्सईएन, जल निगम
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