वृंदावन (ब्यूरो)। चैतन्य बिहार निवासी सुमित्रा देवी ने न्यायालय के आदेश के बाद भी दर्शन नहीं करने देने का आरोप इस्कॉन मंदिर प्रबंध तंत्र पर लगाया है। उन्होंने जिलाधिकारी से इसकी शिकायत करते हुए अन्य कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
सुमित्रा का कहना है कि एक तरफ तो इस्कॉन मंदिर में दर्शन से कभी न रोके जाने की बात अदालत में कहते हैं और दूरी तरफ मंदिर प्रवेश नहीं करने देते। महिला ने इस्कॉन मंदिर प्रबंधतंत्र पर यौन शोषण सहित कई गंभीर आरोप लगाते हुए न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने की मांग जिलाधिकारी से की है।
मुंबई निवासी सुमित्रादेवी दासी के अनुसार उन्हें अपर जिला जज द्वारा 12 जुलाई, 2012 को दिए गए आदेश में इस्कॉन मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन करने की अनुमति प्रदान की गई थी। सामाजिक कार्यकर्ता लाल बाबा ने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को मंदिर में दर्शन करने से नहीं रोका जाना गलत है। इस बारे में मंदिर प्रबंधतंत्र के पदाधिकारी गणपतिदास ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि महिला श्रद्धालु को मंदिर में दर्शन करने के लिए कभी नहीं रोका गया। यौन शोषण के आरोप के मामले में कहा कि वह हर जांच के लिए तैयार हैं।