नगरिया दसविसा और नगरिया सातविसा में वैवाहिक समारोहों में लौकी की लौंज खाने से करीब 500 लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। रात में इन लोगों को उल्टी होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
खाद्य विभाग की टीम की जांच में पता चला कि दोनों समारोहों में बने लौंज के लिए मावा एक ही दुकान से मंगाया गया था। टीम ने लौंज सहित अन्य पकवानों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं।
नगरिया दसविसा में सोमवार शाम अमर चंद की लड़की की बारात पलवल के रायदासका ग्राम से आई थी। बरातियों को दावत में लौकी की लौंज भी परोसी गई। इसे खाने के बाद उन्हें उल्टी होने लगीं। देखते ही देखते एक के बाद एक बराती की तबीयत खराब होने लगी।
बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी होता देख समारोह में हड़कंप मच गया। बरातियों को उपचार के लिए निजी वाहनों से सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों की संख्या बढ़ती देख चिकित्सकों के हाथ-पैर फूलने लगे। थोड़ी देर में मरीजों की संख्या 300 पहुंच गई।
कुछ मरीजों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों में ले जाया गया। स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के बाद तबियत में सुधार होने पर चिकित्सकों ने सभी को छुट्टी दे दी। तब तक गांव नगरिया सातविसा में हरगोपाल के बेटे के तिलक समारोह में फरीदाबाद से आए करीब 200 लोग भी लौकी की लौंज खाने से फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो गए। फिर से स्वास्थ्य केंद्र पर मरीज ही मरीज नजर आने लगे।
सूचना मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी विवेक मिश्रा चिकित्सकों की टीम के साथ स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। एसडीएम छाता रामअरज यादव, सीओ छाता पीयूष सिंह आदि पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। एसडीएम ने मरीजों को एंबुलेंस से निजी अस्पतालों में भर्ती कराया।
खराब मावा से होती है फूड प्वाइजनिंग
फिजीशियन डा. प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि लौकी की लौंज मावा से बनाई जाती है। यदि यह मावा खराब हो तो इससे फूड प्वाइजनिंग हो जाती है। लौंज में मेवा और एसेंस डाले जाने के कारण लोगों को खराब मावा का पता भी नहीं चल पाता। इसे खाने के दो से तीन घंटे में ही लोगों को उल्टी होने लगती हैं।