यात्रा से पहले सोमवार को वृंदावन के कृष्ण कृपा धाम में संत-समागम हुआ। इस बैठक में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज, भाजपा सांसद मनोज तिवारी, और देशभर से आए 200 से अधिक संतों और महंतों ने भाग लिया। बैठक में यात्रा की रूपरेखा, अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं पर विशेष चर्चा की गई। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह यात्रा पूरी शालीनता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ निकाली जाएगी।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन भी है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि ब्रज क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री पर रोक लगे, यमुना शुद्ध हो, और धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रगीत गूंजे। जब तक सभी सनातनी एकजुट नहीं होते, हमारा प्रयास जारी रहेगा उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों और मस्जिदों में राष्ट्रगीत का वादन यह दर्शाने के लिए होना चाहिए कि कौन इस मातृभूमि से प्रेम करता है और कौन नहीं।
झांकियां, रथ और अनुयायियों का हुजूम
यात्रा में अलग-अलग समाजों के महापुरुषों की झांकियां, गौरक्षा रथ, बागेश्वर बालाजी रथ, और अन्य धार्मिक रथ यात्रा का हिस्सा होंगे। पिछली यात्रा की तरह इस बार भी बुंदेलखंड के खली बद्री विश्वकर्मा, जो बालों से रथ खींचते हैं, साथ चल सकते हैं।