हेलिकॅप्टर दुर्घटना में सात वायुसेना कर्मियों की मौत से त्रिशूल एयरफोर्स स्टेशन शोक में डूबा है। अफसर और कर्मचारी पूरे दिन मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने के प्रयास करते रहे। इस बीच लखनऊ में पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को देर शाम स्टेशन की 111 हेलिकॉप्टर यूनिट के कमांडिंग आफीसर विंग कमांडर टीएनबी सिंह, जूनियर वारंट आफीसर पी मुखर्जी और कारपोरल मनोज यादव के शव यहां पहुंच गए। रविवार को सुबह साढ़े सात बजे इन्हें त्रिशूल एयर बेस में सलामी दी जाएगी उसके बाद इनका अंतिम संस्कार शहर के मॉडल टाउन श्मशान भूमि पर किया जाएगा। जवानों की अंत्येष्टि में एयर चीफ मार्शल के भी शामिल होने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय से हादसे में मारे गए दो अधिकारियों और वायु सैनिकों को शहीद का दर्जा मिल गया है।
शुक्रवार शाम को जिस स्थल पर हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ, वहां से सारे अफसरों और जवानों के शव वायुसेना ने अपने कब्जे में लेकर लखनऊ पहुंचा दिए थे। वहां बख्शी के तालाब स्थित एयर कमांड हास्पिटल में ही उनका पोस्टमार्टम कराया गया। उसके बाद सात में से तीन जवानों के शव शनिवार को बरेली त्रिशूल एयरपोर्ट लाए गए। बाकी चार मृतकों के शव उनके परिजनों के आग्रह पर वायुसेना ने उनके पैतृक जिलों में भिजवा दिए हैं।
स्वाड्रन लीडर आर मनु कोट्टायम (केरल) के, सार्जेंट डी पांडा संभलपुर (उड़ीसा), कारपोरल आरके सिंह जलपाइगुड़ी (पश्चिम बंगाल), लीडिंग एयर क्राफ्ट्समैन डीएल नायडू श्रीकाकुलम (आंध्रप्रदेश) के रहने वाले थे। इस बीच वायुसेना की ओर से जिला प्रशासन को भी यह जानकारी दी गई कि रविवार को दिन में 12 बजे से एक बजे के बीच तीनों जवानों की अंत्येष्टि शहर के मॉडल टाउन श्मशान भूमि पर की जाएगी।
सवाल खड़े करती है दुर्घटना
सेवानिवृत्त एयर मार्शल अशोक गोयल के अनुसार भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर ध्रुव का दुर्घटनाग्रस्त होना इसलिए हैरत में डालता है क्योंकि इस तकनीकी के हेलिकॉप्टर का असल काम ही राहत कार्यों के अभियान को अंजाम देने का है। ऐसे में, यह सवाल अहम है कि यह हेलिकॉप्टर आखिर दुर्घटनाग्रस्त क्यों हुआ? यह हल्के होते हैं, इसलिए विपरीत परिस्थितियों में इन्हें जल्द से जल्द संतुलित किया जा सकता है।
इस हेलिकॉप्टर को ट्रेंड पायलट क्यों संतुलित नहीं कर पाए, यह भी एक सवाल है। उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर दुर्घटना के तीन कारण होते हैं- पहला- मौसम का प्रभाव। दूसरा तकनीकी कारण और तीसरी मानवीय भूल। इस दुर्घटना का क्या कारण रहा, यह जानना बेहद जरूरी है। चूंकि दुर्घटना के वक्त मौसम ठीक था इसलिए दूसरे या तीसरे में से कोई एक कारण ही होगा। अब कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी तो होगी ही।
भारतीय वायु सेना यह भी पता लगाएगी कि इस दुर्घटना के कारण क्या रहे? अगर तकनीकी कारण रहे तो भविष्य के लिए सुधार के उपायों पर भी काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सात जवानों की मौत बेहद दुखद है। वायु सेना में हर जवान का बड़ा महत्व होता है। उनका जाना वायु सेना के लिए अपूरणीय क्षति है।
हेलिकॉप्टर हादसे की होगी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी
बरेली से इलाहाबाद जा रहे भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर के सीतापुर में दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के मामले की उच्च स्तरीय कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश हो गए हैं। दुर्घटना पर दो दिन तक चुप्पी साधे रखने के बाद शनिवार देररात त्रिशूल एयरफोर्स स्टेशन की ओर से इसकी पुष्टि कर दी गई। शनिवार को सुबह सेंट्रल एयर कमांड इलाहाबाद के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल जसविंदर चौहान ने त्रिशूल पहुंचकर स्टेशन के अफसरों को न सिर्फ तलब किया बल्कि मृतकों के परिजनों को सांत्वना भी दी। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी हरमिंदर चौहान भी थीं। उन्होंने भी मृतक वायुसेना कर्मियों के परिजनों को दिलासा दी।
स्टेशन की ओर से शनिवार रात बाकायदा प्रेस रिलीज जारी करके घटना की जानकारी दी गई। बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव मार्क-थर्ड ने त्रिशूल स्टेशन से शुक्रवार को दोपहर बाद तीन बजकर 53 मिनट पर इलाहाबाद के लिए उड़ान भरी थी। उसे स्टेशन की 111 हेलिकॉप्टर यूनिट के कमांडिंग आफीसर विंग कमांडर टीएनबी सिंह उड़ा रहे थे। सीतापुर में अटरिया गांव के पास चार बजकर 57 मिनट पर हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें सवार सातों लोगों की मौत हो गई।
बताते हैं कि रक्षा मंत्रालय ने भी इस दुर्घटना की रिपोर्ट वायुसेना से तलब की है। कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश रक्षा मंत्रालय और वायुसेना मुख्यालय से हुए हैं। इसमें दुर्घटना के कारणों की जांच की जाएगी। हालांकि दुर्घटना को लेकर वायुसेना के अफसर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। फिलहाल इसके पीछे तकनीकी गड़बड़ी होने का अनुमान लगाया जा रहा है।