मौसम की बेरुखी से जिले में गेहूं की फसल को नुकसान हो रहा है। वर्तमान में लगभग 10 प्रतिशत फसल को नुकसान है। यदि तापमान में बढ़ोतरी होती है तो यह नुकसान और भी बढ़ सकता है। मौसम की बेरुखी से किसान भी चिंतित हैं। वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक सप्ताह तक तापमान में गिरावट रहती है तो फसल का नुकसान कम हो सकता है।
कभी कड़ाके की सर्दी तो कभी तेज धूप लोगों के लिए ही नहीं फसलों के लिए भी नुकसान दायक है। जिले की प्रमुख फसल गेहूं है। जिले में 150669 हेक्टेयर में गेहूं की फसल है। मौसम के बिगडे़ मिजाज से जहां गेहूं के पौधे की बढ़वार कम हुई है वहीं दाना भी अपेक्षाकृत पतला है। इसे लेकर किसान भी चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि इस बार सर्दी कम पड़ी है। तापमान अधिक रहने से उनकी गेहूं की फसल काफी प्रभावित हुई है।
जिले के सभी विकास खंडों में गेहूं की फसल को अभी तक 8-10 प्रतिशत का नुकसान है। किसान भी मौसम की बेरुखी से काफी चिंतित है। उनका कहना है कि मौसम ने तो किसानों को बर्बाद ही कर दिया। कभी बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद हुई तो कभी सूखा से। अब तापमान फसल की उत्पादकता प्रभावित कर रहा है।
सुल्तानगंज क्षेत्र के किसान बलराम का कहना है कि उन्होंने 15 बीघा खेत में गेहूं की फसल की है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष गेहूं के पौधे की लंबाई कम है। जो दाने पड़े हैं वह भी पतले हैं। पिछले कुछ दिनों से सर्दी पढ़ने से फसल में थोड़ा सुधार हुआ है। फसल में 10 प्रतिशत से अधिक का नुकसान है। यदि उन्हें पता होता तो वह गेहूं की फसल इतने ज्यादा क्षेत्रफल में नहीं करते।
तापमान में बढ़ोत्तरी से गेहूं की फसल कुछ प्रभावित हुई है। यदि एक सप्ताह तक तापमान में गिरावट जारी रहती है तो नुकसान की भरपाई हो सकती है। इस बीच यदि तापमान बढ़ा तो गेहूं की फसल में नुकसान बढ़ सकता है।
पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी मैनपुरी