दूर-दूर से मत्था टेकने आते हैं श्रद्धालु
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नवरात्र के पहले दिन से तीन सौ साल पुराने माता शीतला देवी मंदिर में श्रद्धालु अपनी हाजिरी लगाने के लिए उमड़ते हैं। यह जिले के सबसे बड़े देवी मंदिरों में से एक है। चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां लोग नेजा चढ़ाने आते हैं।
जनपद से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है प्रसिद्ध माता शीतला देवी मंदिर। यहां नवरात्रों में पूजा अर्चन का विशेष महत्व है। इस मंदिर के बारे में लोगों में कई कहानियां प्रचलित हैं। किदवंति है कि कभी एक नास्तिक राजा ने मंदिर माता के आस्तित्व को लेकर सवाल किया था। उक्त राजा के पत्नी के दस वर्ष बीतने के बाद भी कोई संतान नहीं हुई। आखिर में पत्नी सहित जब राजा स्वयं मंदिर में माता शीतला देवी मंदिर में माथा टेकने पहुंचा तो उसे एक पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई। संतान प्राप्ति के बाद राजा ने माता के मंदिर में एक विशाल छत्र भी भेंट किया। शीतला देवी मंदिर के बारे में ये भी मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे दिल से मन्नत मांगता है। माता रानी उसकी इच्छा जरूर पूरी करती है। तभी तो यहां आने वाले भक्तों में देशभर के लोग शामिल हैं।
मंदिर को लेकर कई और कहानियां भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि एक बार किसी ने माता रानी की मूर्ति चोरी कर ली। इसकी जानकारी होते ही मंदिर के पुजारियों ने भयभीत होकर मंदिर के पट बंद कर दिए। लोगों को जब बारे में पता चला तो सभी मंदिर पहुंचे तो माता रानी की मूर्ति मौजूद थी।