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अनदेखी से दम तोड़ रही खेल प्रतिभाएं

Fri, 26 Aug 2016 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
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एमडीयू में हुआ नार्थ जोन बैडमिंटन चैंपियनशिप - फोटो : amar ujala
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 जिले में सुविधाओं की किल्लत से खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। संसाधनों का अभाव उन्हें मुकाम नहीं छूने दे रहा है। गांव तो दूर शहर में भी खेल के मैदान दुर्दशा के शिकार हैं। सरकार की ओर से बजट न मिलने की बात कहकर संबंधित अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं।
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खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष अच्छा खासा बजट उपलब्ध कराया जाता है। पर, यह रकम खेल प्रतिभाओं को निखारने के बजाय निर्माण कार्यों में ही खर्च किया जा रहा है। यही कारण है कि शहर के लेकर गांव तक खेल प्रतिभाएं दम तोड़ती नजर आ रही है। वहीं विभागीय अनदेखी पर गौर करें, तो पायका के तहत गांवों में बने मैदान दुर्दशा और उपेक्षा के शिकार हैं। कहीं जलभराव है तो कहीं बड़ी बड़ी घासें उगी हुई हैं। वहीं खिलाड़ियों को संसाधनों की किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है। युवा कल्याण अधिकारी बजट न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। 


जिले में हैं 118 पायका मैदान
मैनपुरी। जिले में कुल 118 पायका मैदान हैं। इनमें 115 ग्राम पंचायत स्तरीय और तीन मैदान मैनपुर, किशनी और बेवर में ब्लाकस्तरीय हैं। गांवों में बने अधिकांश पायका मैदान तो अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। कई मैदानों पर तो गांववालों का कब्जा है। वहां उपले थापने और जानवर बांधे जा रहे हैं।
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कागजों पर चल रहे युवक मंगल दल
मैनपुरी। देहात में खेलों और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर युवक मंगल दल गठित किए जाते हैं। युवा कल्याण विभाग के मुताबिक ही जिले में केवल 40 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में ही युवक मंगल दल गठित हैं। ये भी केवल कागजों में ही चल रहे हैं। पूर्व खिलाड़ी गजेंद्र सिंह चौहान उर्फ मुन्ना, मणिकांत चतुर्वेदी, रज्जन विल्सन, टीटू भाटिया का कहना है कि जिले में खेल गतिविधियों के इन हालातों में जिले से खेल प्रतिभाएं निकलकर बाहर आना नामुमकिन नहीं तो असंभव जरूर है। 

लंबे समय से नहीं मिला बजट
जिला युवा कल्याण अधिकारी अजय कुमार त्रिवेदी बताते हैं कि कई साल से विभाग को बजट ही नहीं मिला है। इसके अभाव में प्रतियोगिताएं नहीं हो पा रही हैं। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में कुछ पद भी समाप्त कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाएं हैं, उन्हें आगे लाने की दिशा में पहल होनी चाहिए।

सरकार से नहीं मिलता सहयोग
मैनपुरी। जिला फुटबाल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल दुबे कहते हैं कि सरकारी सहायता के अभाव में फुटबाल तो दम तोड़ रहा है। सरकार क्रिकेट जैसे खेल के लिए तमाम बजट और सुविधाएं देती है, मगर फुटबाल, हाकी के खिलाड़ियों के लिए सरकार का खजाना हमेशा खाली ही रहता है। 

प्राथमिक शिक्षा में ही शामिल हो खेल
मैनपुरी। वालीबाल एसोसिएशन के संयुक्त सचिव/ जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान कहते हैं कि प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में ही खेलों को शामिल करना होगा। वहीं पायका के मैदानों के लिए रखरखाव और प्रशिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए। ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रशासन, खेल विभाग और जन प्रतिनिधियों का सहयोग मिले, तभी बात बनेगी।  
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