उप्र शिक्षक-कर्मचारी समन्वय समिति के बैनर तले गुरुवार को शिक्षक कर्मचारियों ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के विरोध में तिकोनिया पार्क में धरना-प्रदर्शन किया। पेंशन व्यवस्था खत्म होने का विरोध कर सीएम को संबोधित ज्ञापन आरओ अविनाश चंद्र मौर्य को सौंपा।
जिलाध्यक्ष राजीव यादव ने कहा कि सेवानिवृत्त के बाद वृद्धावस्था में पेंशन ही शिक्षक और कर्मचारियों का एक मात्र सहारा होती है। सर्वोच्च न्यायालय ने एक निर्णय में यह मत भी व्यक्त किया है कि पेंशन शिक्षक व कर्मचारी का अधिकार है। फिर भी उप्र सरकार ने केंद्र सरकार के निर्णय का सहारा लेकर एक अप्रैल 2005 से नियुक्त शिक्षकों को दी जा रही पेंशन से वंचित कर दिया। जबकि केंद्र के निर्णय के विपरीत केरल, तमिलनाडू, त्रिपुरा आदि पुरानी व्यवस्था के अनुसार पेंशन दे रही है। दस वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी नई पेंशन योजना लागू नहीं हो पाई है। इसके बाद सेवानिवृत्त बेसहारा भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यदि सत्ता में वापस आना चाहती है तो पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करें। अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहे।
समिति के संयोजक कृष्णानंद दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार ने शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों को अनदेखा कर सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार कर लागू करने की घोषणा कर दी। जादूगरी के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि कर्मचारियों के वेतन में 23.55 की बढ़ोत्तरी की जबकि वास्तविकता में मात्र 14.55 की वृद्धि हुई है जो पिछले छठवें वेतन आयोग की वृद्धि से काफी कम है। जबकि महंगाई चरम पर है। यदि इसमें बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले चुनाव में भाजपा को मुंह की खानी पड़ेगी। इसके बाद सीएम से संबोधित ज्ञापन प्रभारी आरओ को दिया। इस मौके पर अशोक यादव, महेंद्र प्रताप सिंह, रामलखन मिश्रा, सत्यवीर सिंह, डाक्टर कमलेश यादव, महेश आर्य, सतीश समर्थ, अवलेंद्र यादव, अशोक पाल, विजेंद्र, दलवीर कठेरिया, राजनरायन दुबे, अजय वैस, आलोक शाक्य आदि मौजूद रहे।