सरकार के स्कूल चलो अभियान का असर बेटियों पर अधिक दिख रहा है। जागरूक हो रहे अभिभावक भी अब वे बेटियों को स्कूल भेजने लगे हैं। परिषदीय स्कूलों में बेटियों का पंजीकरण बेटों से आगे निकल रहा है। चालू शिक्षा सत्र के दौरान अब तक हुए नामांकन में जहां बालकों की संख्या 88086 रही वहीं बेटियों की संख्या ने 94985 का आंकड़ा पार कर कीर्तिमान बना लिया है। अधिकांश कक्षाओं में भी हुए प्रवेश में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है।
हालांकि बहुत से लोग अभी भी इस सच्चाई को इससे इतर मानते हैं। उनका कहना है कि कुछ अभिभावक (खासकर अशिक्षित एवं ग्रामीण अंचल) आज भी बेटियों की तुलना में बेटों पर अधिक ध्यान देते हैं। इनके पक्षपात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह लोग पालन-पोषण से लेकर उनके भविष्य निर्माण पर भी अधिक खर्च करते हैं। लोगों की मानें तो यह लोग बेटों की शिक्षा इंगलिश मीडियम और महंगे निजी स्कूलों में कराते हैं। वहीं, बेटियों को परिषदीय स्कूलों में पंजीकृत करा इन्हें साक्षर भर बना रहे हैं।
कक्षा पंजीकरण बालक बालिकाएं
एक 28937 14547 14390
दो 30028 14649 15379
तीन 25813 12546 13267
चार 23848 1144 12404
पांच 21404 10075 11329
छह 18384 8908 9476
सात 18107 8471 9636
आठ 16550 7446 9104
कुल पंजीकरण- 1,83071
कुल पंजीकृत बालक - 88086
कुल पंजीकृत बालिकाएं - 94985
वर्जन...
आज भी अभिभावक बेटों के प्रति अधिक केयरिंग हैं। अशिक्षित और ग्रामीण अंचल के लोग तो इन्हें पढ़ाने में भी भेदभाव करते हैं। संस्था में 75
से 80 प्रतिशत लड़के हैं। लड़कियां 50 से 45 प्रतिशत ही।
-अखिलेश वर्मा, प्रबंधक, एके एजूकेशनल एकेडमी
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी बेटियों को पढ़ाने के लिए जागरूक हो रहे हैं। स्कूल चलो अभियान की यह सफलता है कि ग्रामीण भी अब बेटियों को शिक्षा देने में पीछे नहीं हैं। यही कारण है कि लड़कियों संख्या बढ़ी है।
-रामकरन यादव, बीएसए, मैनपुरी।