फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सर्व शिक्षा अभियान की सफलता में बेटियां अग्रणी

Sun, 26 Feb 2017 11:48 PM IST
साोनम वारसी
विज्ञापन
सरकारी स्कूल के बच्चे
विज्ञापन
सरकार के स्कूल चलो अभियान का असर बेटियों पर अधिक दिख रहा है। जागरूक हो रहे अभिभावक भी अब वे बेटियों को स्कूल भेजने लगे हैं। परिषदीय स्कूलों में बेटियों का पंजीकरण बेटों से आगे निकल रहा है। चालू शिक्षा सत्र के दौरान अब तक हुए नामांकन में जहां बालकों की संख्या 88086 रही वहीं बेटियों की संख्या ने 94985 का आंकड़ा पार कर कीर्तिमान बना लिया है। अधिकांश कक्षाओं में भी हुए प्रवेश में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है।
विज्ञापन

हालांकि बहुत से लोग अभी भी इस सच्चाई को इससे इतर मानते हैं। उनका कहना है कि कुछ अभिभावक (खासकर अशिक्षित एवं ग्रामीण अंचल) आज भी बेटियों की तुलना में बेटों पर अधिक ध्यान देते हैं। इनके पक्षपात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह लोग पालन-पोषण से लेकर उनके भविष्य निर्माण पर भी अधिक खर्च करते हैं। लोगों की मानें तो यह लोग बेटों की शिक्षा इंगलिश मीडियम और महंगे निजी स्कूलों में कराते हैं। वहीं, बेटियों को परिषदीय स्कूलों में पंजीकृत करा इन्हें साक्षर भर बना रहे हैं।
 
    कक्षा          पंजीकरण           बालक         बालिकाएं      
    एक            28937             14547        14390
     दो            30028             14649          15379
     तीन           25813              12546           13267
    चार            23848             1144            12404
    पांच            21404            10075        11329  
    छह              18384              8908             9476
    सात             18107                 8471              9636
    आठ           16550                7446              9104
          कुल पंजीकरण- 1,83071
          कुल पंजीकृत बालक - 88086
          कुल पंजीकृत बालिकाएं - 94985

वर्जन...          
आज भी अभिभावक बेटों के प्रति अधिक केयरिंग हैं। अशिक्षित और ग्रामीण अंचल के लोग तो इन्हें पढ़ाने में भी भेदभाव करते हैं। संस्था में 75
से 80 प्रतिशत लड़के हैं। लड़कियां 50 से 45 प्रतिशत ही।
-अखिलेश वर्मा, प्रबंधक, एके एजूकेशनल एकेडमी

ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी बेटियों को पढ़ाने के लिए जागरूक हो रहे हैं। स्कूल चलो अभियान की यह सफलता है कि ग्रामीण भी अब बेटियों को शिक्षा देने में पीछे नहीं हैं। यही कारण है कि लड़कियों संख्या बढ़ी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-रामकरन यादव, बीएसए, मैनपुरी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें