पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन जैन मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म पर चर्चा हुई। इसमें जैन विद्वानों ने कहा कि व्यक्ति को सामाजिक, पारिवारिक तथा धार्मिक किसी भी क्षेत्र में छल-कपट नहीं करना चाहिए। सदैव मन-वचन कार्य की एकरूपता रखो, अपने चंचल चित्त को रोकने के लिए आर्जव धर्म का सहारा लो।
श्री आदिनाथ दिगंबर बड़ा जैन मंदिर में बाल ब्रह्मचारी साधना दीदी ने सामायिक पाठ कराया। साथ ही कहा कि मायाचारी करने वाले व्यक्ति का मन स्थिर नहीं रहता। वह व्याकुल रहता है। ऐसा व्यक्ति सोचता कुछ है, बोलता कुछ है और करता कुछ और ही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मायाचार के परिणामों के कारण मृदुमति नाम के साधु को भी दुख सहने पड़े थे।
फिर जब आज का व्यक्ति बार-बार छल कपट के परिणाम कर रहा है तो उसकी दशा क्या होगी? यह स्वयं सोचना चाहिए। इस मौके पर विजय जैन, सुरेश चंद्र, सुनील जैन, ब्रजेश जैन, रमेश चंद्र जैन, सौरभ जैन, संजय जैन, सम्यक जैन, संजीव
जैन, आदि मौजूद रहे। प्रश्न मंच के पुरस्कार साधना जैन ने वितरित किए।
वहीं भोगांव में पार्श्वनाथ जिनालय में जैन विद्वान ब्रह्मचारी पंडित धरणेंद्र कुमार जैन ने कहा कि सामाजिक जीवन में भी शांति बनाए रखने के लिए क्रोध, मान और मायाचारी को छोड़कर अहिंसा धारण करनी चाहिए। उन्हाेंने कहा कि क्षमा को धारण करके ही जियो और जीने दो के सिद्धांत पर अमल हो सकता है। इस मौके पर डा. योगेश जैन, सुनील जैन, आशीष जैन, राहुल जैन, अशेष जैन, राजीव जैन आदि मौजूद रहे।