मैनपुरी। अतिकुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई। केंद्र पर लगभग डेढ़ माह से स्टाफ की भी तैनाती कर दी गई। इसके बाद भी केंद्र पर अब तक एक भी बच्चा उपचार के लिए नहीं आया। जिले में लगभग 1600 कुपोषित और 300 अतिकुपोषित बच्चे है।
शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना कराई गई। इस केंद्र पर आने वाले बच्चों को बेहतर उपचार के साथ पौष्टिक भोजन भी दिए जाने का प्रावधान है। कुपोषित बच्चों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए जिला अस्पताल में सीएमओ ने स्टाफ की भी तैनाती कर दी। 29 मई को पोषण पुनर्वास के लिए एक चिकित्साधिकारी, चार स्टाफ नर्स, एक न्यूट्रीशियन, एक रसोइया तथा एक केयर टेकर की तैनाती कर दी। स्टाफ तो तैनात हो गया लेकिन अभी तक कोई भी कुपोषित बच्चा अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया।
प्रावधान के अनुसार कुपोषित बच्चों के केंद्र पर भर्ती के दौरान उनके साथ देखभाल के लिए रहने वाली मां अथवा परिवार की अन्य महिला को भी 100 रुपये प्रतिदिन दिए जाने की व्यवस्था है। इसके बाद भी संबंधितों की लापरवाही के चलते कुपोषित बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
शासन स्तर से जो व्यवस्थाएं करने को कहा गया था वह सभी व्यवस्थाएं पूरी कर दी गई हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग एवं सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों एवं चिकित्सा अधीक्षकों से बच्चों को भर्ती कराने को कहा गया है। इस कार्यक्रम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डाक्टर वीके गुप्ता, सीएमओ मैनपुरी
जिले में कितने बच्चे कुपोषित और अतिकुपोषित हैं यह जानकारी उन्हें नहीं है। रिकार्ड के आधार पर ही जानकारी हो सकेगी। सभी सुपरवाइजर और सीडीपीओ को कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य खराब होने पर पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कराने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों में जागरूकता की कमी के चलते लोग केंद्र पर नहीं आ रहे।
साहब यादव, डीपीओ मैनपुरी