देवी रोड स्थित खानकाह ए मोहम्मदिया अफजलिया में गुरुवार को गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद फातिहा हुई और सबको तबर्रुक तकसीम किया गया। गुस्ल की में शहर और बाहर से आए अकीदतमंदों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
खानकाह ए अफजलिया में चल रहे उर्स के दौरान कुल की रस्म अदा की गई। वहीं गुरुवार को दोपहर जौहर की नमाज के बाद गुस्ल का कार्यक्रम हुआ। इसके बाद फातिहा हुई। उर्स पूरा होने के बाद फातिहा में सज्जादानशीं हाजी मोहम्मद हाशिम जमाल खां ने देश में अमनचैन की दुआ की। इसके बाद कव्वालियों का आयोजन हुआ। सज्जादानशीं ने बाहर से आए जायरीन, प्रशासन, नगरपालिका, बिजली विभाग आदि का शुक्र अदा किया। इस मौके पर रदौली शरीफ के सज्जादानशीं नैय्यर मियां, मुरादाबाद, शिफ्ते नबी, नासिर अली, एजाज गुड्डू, नदीम इलाही, मोहम्मद असलम बॉबी, नासिर भाई, एहतिशाम, अशफाक अली हुसैन, अली हुसैन, अली हैदर मौजूद रहे।
गुरुवार को हजरत मलक मीर शाह की दरगाह पर ख्वाजा अजमेर शरीफ के कुल शरीफ के साथ ही पूरी रात कव्वाली का कार्यक्रम हुआ।
हजरत मलकमीर शाह की दरगाह पर चल रहे सालाना उर्स में कमेटी के सदस्यों और कमेटी अध्यक्ष ने चादरपोशी की। गुरसहायगंज के साजिद कव्वाल ने और मुन्ना मेहरबान ताज वारसी ने कई सूफियाना कव्वाली पेश की। मुन्ना मेहरबान ने ‘कलाम हक निभाना मेरे हुसैन का, दिल ठिकाना है मेरे हुसैन का।’ अयाज साबरी आगरा ने कहा ‘मौला अली का सदका गौस कुतुब’ और ‘बली मौला अली के नाम की धूम मची गली गली दमा दम अली अली मौला अली।’ रफी साबरी कव्वाल जालौन, अजीम भारती कानपुर आदि कव्वाल पार्टियों ने भी कलाम पेश किया। यूनुस अली, हैदर अली, हसनेन, खुसनूर, अकरम, इरशाद, हिदायत अली, रफी अहमद, शमशाद अली, रहमत अली आदि लोग मौजूद रहे।