मैनपुरी। दीवानी न्यायालय में प्रशासनिक लिपिक के पद पर तैनात रहे अनूप कुमार यादव के जेल जाने के बाद उसको निलंबित कर दिया गया है। उसने वर्ष 2021 से 2026 तक 1.24 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला अमानत में खयानत का पाया गया है। पुलिस ने इसी धारा में रिमांड मांगा था जिसे मंजूर करके उसको जेल भेजा जा चुका है।
अनूप यादव को जेल की बैरक नंबर पांच में रखा गया है। इस बैरक को क्वारंटाइन बैरक कहा जाता है। जेल में उसकी पहली रात बेचैनी से गुजरी है। वह बुधवार को भी जेल में गुमसुम और मायूस रहा है। दीवानी न्यायालय के बिल विभाग में तैनात रहे अनूप कुमार यादव ने मार्च 2021 से दिसंबर 2025 तक 12479152 रुपये की धनराशि की अपने पदीय दायित्वों का दुरुपयोग करके वित्तीय अनियमितता करते हुए यह धनराशि अपनी मां रामादेवी, पत्नी रीनादेवी, भाई अभिषेक यादव के खातों में ही ट्रांसफर की।
लेखा परीक्षण में 12479152 रुपये की धनराशि के घोटाले की पुष्टि होने के बाद प्रभारी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी देवव्रत राय चौधरी ने तत्कालीन प्रशासनिक लिपिक अनूप कुमार यादव के खिलाफ थाना कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 (5) तथा 318 (4) के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में मामला 316 (5) का माना है। इस धारा को अमानत में खयानत माना जाता है। इस धारा में अपराध साबित होने पर तीन साल तक की सजा तथा जुर्माना होता है। इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट न्यायालय में होती है।
एक साथ नहीं चल सकती दोनों धाराएं
अनूप यादव के खिलाफ जिन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। उन धाराओं की सुनवाई एक साथ नहीं हो सकती है। पूर्व डीजीसी चतुर सिंह बताते हैं कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 (5) तथा 318 (4) के तहत एक साथ सुनवाई नहीं हो सकती है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय भी दिया है। इसके चलते ही पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 (5) के तहत रिमांड मांगा है। इस धारा के तहत लोक सेवक द्वारा वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है।