मैनपुरी। कस्बा औंछा में 15 दिसंबर की रात को सराफा के दो व्यापारियों की दुकानों के शटर तोड़कर करीब सवा करोड़ के जेवर-नकदी चोरी की वारदात में गैंग के दूसरे आरोपी को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से 290 ग्राम चांदी, 5.9 ग्राम सोना और 95 हजार की नकदी बरामद हुई है। एसपी ग्रामीण ने बताया कि शेष आरोपियों की तलाश की जा रही है।
औंछा क्षेत्र के सराफा व्यापारी मनोज वर्मा की दुकान से 15 दिसंबर की रात को चोर करीब 200 ग्राम सोने के जेवर, 15-20 किलो चांदी और विपिन गुप्ता की दुकान के शटर तोड़ कर 12 किलो चांदी करीब 120 ग्राम सोने के जेवर चोरी कर ले गए थे। जांच में पुलिस को पता चला कि हाथरस के पिता पुत्र के गैंग ने वारदात को अंजाम दिया है। प्रभारी निरीक्षक चंद्रपाल सिंह ने दो जनवरी गिरोह के सरगना राजेंद्र सिंह निवासी गांव बाग बधिक थाना सहपऊ हाथरस को 3.400 किग्रा चांदी सहित गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
एसपी ग्रामीण राहुल मिठास ने बताया कि 21 जनवरी को प्रभारी निरीक्षक ने टीम के साथ सराफ की दुकानों से चोरी करने वाले गैंग के दूसरे चोर मोनू उर्फ मानवेंद्र निवासी गांव लोधई थाना सहपऊ हाथरस को गैलानाथ पुल के पास थाना कुरावली से गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से 290 ग्राम चांदी, 5.9 ग्राम सोना और 95 हजार की नकदी और अर्टिका कार बरामद हुई। एसपी ग्रामीण ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया। वहां से पुलिस अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। जल्द ही उसे अन्य साथियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
साथी अरुण के घर पर रची थी साजिश
पुलिस पूछताछ में पकड़े गए मोनू उर्फ मानवेंद्र ने बताया कि उसने साथी हरिओम, कालिया, संतोष, ओमप्रकाश, भवानी शंकर निवासी गांव बाग बधिक थाना सहपऊ जनपद हाथरस के अरुण के घर पर चोरी की साजिश रची थी। योजना में अरुण के पिता राजेंद्र सिंह भी शामिल थे। घटना के समय अरुण के भाई उमेश, अरुण के चाचा सुरेश को भी शामिल किया था। वह उमेश के साथ अर्टिका कार में बैठ कर जैथरा आए थे। घटना के दौरान गाड़ी में वह मौजूद था। चोरी के बाद वह उन लोगों ने एक ज्वैलर्स से माल बेचने के बारे में जानकारी भी की थी। बाद में साथी हरिओम और अरुण ने कासगंज में किसी सराफा के यहां कुछ जेवर बेचे गए।
आत्मसमर्पण की फिराक में था मोनू
एसपी ग्रामीण ने बताया कि पूछताछ करने पर पकड़े गए मोनू उर्फ मानवेंद्र ने बताया कि जब उसे पता चला कि चोरी की घटना में उसका भी नाम आ चुका है। तो वह कोर्ट में समर्पण के लिए हिस्से में आए जेवर नकदी आदि लेकर आया था। गाड़ी की नंबर प्लेट उतार ली थी, ताकि गाड़ी की पहचान न हो।