निरीक्षण के दौरान कमेटी ने आश्रम प्रभारी से पूछताछ की। पता लगा कि वर्तमान में लगभग 92 वृद्धजन आश्रम में निवास कर रहे हैं। न्यायिक अधिकारियों ने आश्रम में भोजन की व्यवस्था और रजिस्टरों की गहनता से जांच की। जांच में पाया गया कि वृद्धजनों को भोजन में तोरई की सब्जी, दाल, चावल और रोटी दी जा रही थी। निरीक्षण के समय आश्रम संचालिका कमलेश कुमारी उपस्थित नहीं थीं।
स्टाफ ने बताया कि वह वृद्धा आश्रम के कार्य से लखनऊ गई हैं। इसके बाद अधिकारियों ने वृद्धजनों से वार्ता की। इसी बातचीत में 80 वर्षीय वृद्ध ने अपनी दर्दनाक कहानी साझा की। कमेटी ने आश्रम के स्टाफ को आदेशित किया कि किसी भी वृद्ध को कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। वृद्धों को कोई भी कानूनी सहायता चाहिए तो उनके संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र लिखें।
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