फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फैसला आते ही दोनों पक्षों में बढ़ा तनाव

Thu, 28 Jul 2016 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
विज्ञापन
तनाव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
थाना कुरावली के नगला मोहन निवासी संजू बघेल व भंवर सिंह को गांव के सुरेंद्र की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाए की खबर जैसे ही गांव में पहुंची वैसे ही दोनों पक्षों के लोग उनके घरों पर जमा हो गए। जब मृतक पक्ष के लोग दीवानी अदालत से घर पहुंचे तो तनाव बढ़ गया। वजह यह थी कि उनको जीत मिली थी और आरोपियों को फांसी की सजा होने के बाद से खुश थे। डर के चलते अधिकांश ग्रामीण अपने घरों में कैद हो गए। ग्रामीणों ने तनाव की सूचना पुलिस को दी, लेकिन समाचार लिखे जाने तक पुलिस गांव में नहीं पहुंची थी। 
विज्ञापन


नगला मोहन निवासी सुरेंद्र की हुई हत्या के बाद उसका भाई सत्यपाल हर तारीख पर अदालत आता था। उसे भी डर था कि कहीं उसके साथ अनहोनी न हो जाए मगर वह अपने भाई के कातिलों को सजा दिलाने पर आमादा था। जब आरोपी संजू और भंवर सिंह की अदालत से जमानत मंजूर हो गई तो उसे एक बार झटका लगा मगर वह हिम्मत नहीं हारा। अपने रिश्तेदारों और पुलिस की मदद से वह अदालत जाता रहा। गुरुवार को भी वह रिश्तेदारों के साथ ही निर्णय सुनने अदालत आया था। सुबह से वह अदालत में काफी तनाव में बैठा था। लंच के बाद जैसे ही अपर जिला जज ने दोपहर एक बजे निर्णय सुनाने के लिए पुकार कराई वैसे ही सत्यपाल भी अदालत में खड़ा हो गया। जज ने जब सुरेंद्र की हत्या के आरोप में संजू और भंवर सिंह को फांसी की सजा सुनाई तो उसके चेहरे पर खुशी नजर आने लगी। सत्यपाल का कहना था कि सुरेंद्र की हत्या में फांसी की सजा तो होनी ही थी। उसके भाई की जिस बेरहमी से सिर काटकर हत्या की गई थी वह दिल दहला देने वाली ही थी। 
निर्णय होने के बाद फांसी के प्रावधानों को पूरा करने में अदालत में काफी समय लगा। आरोपियों को निर्णय की प्रति उपलब्ध कराई गई। कई औपचारिकताएं पूरी की र्गइं। इसके चलते शाम पांच बजे आरोपियों को दीवानी से जेल भेजा गया। इस बीच संजू और भंवर सिंह को फांसी होने की बात गांव पहुंच चुकी थी। चूंकि आरोपी संजू और भंवर सिंह चाचा-भतीजे हैं इसके चलते पूरा परिवार एकजुट हो गया। आरोपियों के समर्थक उनके दरवाजे पर जमा हो गए तभी सत्यपाल भी अपने रिश्तेदारों के साथ गांव पहुंच गया। आरोपियों के परिवारीजनों के चेहरों पर जहां गुस्सा था वहीं सत्यपाल के परिवारीजन और रिश्तेदार काफी खुश थे। इसे लेकर दोनों पक्षों में तनाव हो गया। फांसी होने की बात सुनकर गांव के जो लोग अपने दरवाजों पर बैठे थे वह दोनों पक्षों के गांव पहुंचने पर घरों में कैद हो गए। आलम यह था कि शाम 6:30 बजे ही गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया। लोग डर की वजह से घरों से बाहर नहीं निकले। अमर उजाला टीम जब गांव में पहुंची तो कोई भी ग्रामीण कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुआ। आरोपियों के परिवारीजनों ने बात करने से इंकार कर दिया तो मृतक के परिवारीजनों ने जैसी करनी वैसी भरनी की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। दोनों पक्षों के बीच तनाव की जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस को देदी है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस गांव में नहीं पहुंची थी। मगर दोनों पक्षों के दरवाजों पर उनके रिश्तेदार और समर्थक मौजूद थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें