खालसा पंथ के स्थापना दिवस और वैसाखी पर पंजाबी कालोनी स्थित गुरुद्वारा में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान शबद कीर्तन का आयोजन किया गया।
गुरुद्वारा में सर्वप्रथम निशान साहिब की सेवा की गई। कीर्तन दरबार में शबद कीर्तन से संगत को निहाल किया गया। इसके बाद लंगर का आयोजन किया गया। ज्ञानी कुशल सिंह ने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना 1756 को आज ही के दिन की गई थी। उस दिन नानक निर्मल पंथ को खालसा पंथ में बदल दिया गया था। इस पंथ की स्थापना का उद्देश्य एक परमात्मा की स्तुति करना, निर्बल, कमजोर और महिलाओं की रक्षा करना था। गुरु गोविंद सिंह जी ने लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और धर्म युद्ध के लिए भक्ति और शक्ति का अनूठा मेल किया। इसे ही खालसा नाम दिया गया। गुरु गोविंद सिंह ने सामाजिक भेदभाव समाप्त करने के लिए अमृत का सहारा लिया। उन्होंने समाज के निर्बल लोगों को अमृत पान करा कर खालसा बना दिया और सिंह के रूप में तैयार किया। गुरुद्वारा में वैसाखी पर्व मनाते हुए सभी को वैसाखी की बधाई दी।
संस्था अध्यक्ष हरवंश सिंह ने खालसा पंथ को एक निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण पंथ बताते हुए कहा कि पंथ के लोग हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। इस मौके पर सरदार मान सिंह, सरदार नाहर सिंह, सरदार दलिप सिंह, सरदार हरदीप सिंह, सरदार कुलदीप सिंह, राजेश अरोरा, बोबी, सरदार गुरदीप सिंह, सरदार इंद्रपाल, सरदार अनूप सिंह, सरदार रंजीत सिंह, सरदार जसवीर सिंह, सरदार भवलीन सिंह, सरदार हरप्रीत सिंह, सरदार लवप्रीत सिंह, रौनक, पारस आदि मौजूद रहे।