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असली योद्धा: जान जोखिम में डालकर लोगों को उपचार दे रहे डॉक्टर, 24 घंटे कर रहे सेवा

Tue, 27 Apr 2021 08:56 AM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

कोरोना की दूसरी लहर से जहां हर कोई चिंतित है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालते हुए दिन रात मेहनत कर मरीजों की जान बचाने का प्रयास कर रहे हैं। 
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कोरोना योद्धा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर से जहां हर कोई चिंतित है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालते हुए दिन रात मेहनत कर मरीजों की जान बचाने का प्रयास कर रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच जनता की सेवा के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों ने जहां परिजनों से दूरियां बना ली हैं वहीं मरीजों के इलाज के लिए 24 घंटे सेवाएं दे रहे हैं। 

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महामारी के बीच 24 घंटे सेवा को हैं तैयार 
कोरोना महामारी के बीच ओपीडी सेवा बंद है, लेकिन इसके बाद भी दंत रोग विशेष डॉ. आलोक कुमार कक्ष संख्या 13 में बनाए गए फीवर क्लीनिक पर बैठकर मरीजों को उपचार दे रहे हैं। यहां आने वाले कई मरीज कोरोना संक्रमित भी होते हैं। डॉक्टर इन संक्रमित और गैर संक्रमित मरीजों को उपचार देने में किसी प्रकार का परहेज नहीं कर रहे हैं। ड्यूटी के बाद रात में भी जरूरत पड़ने पर वे सेवा के लिए तैयार हैं। 

परिजनों से दूरियां बना बांट रहे दवाइयां 
कोरोना संक्रमण के बीच जहां जिला अस्पताल की ओपीडी सेवाएं बंद हैं। वहीं फार्मासिस्ट नृपेंद्र कुमार महामारी के बीच मरीजों को दवाइयां बांटने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो महीने से वे कानपुर अपने घर नहीं जा सके हैं। अपनों से अधिक मुझे मरीजों की चिंता है। उनका कहना है कि परिजनों से समय मिलने पर फोन से बात होती है। महामारी से बचाव के लिए जरूरी सुझाव भी देता हूं, ताकि लोग सुरक्षित रहें। 
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जान जोखिम में डाल कर रहे मरीजों की जांच 
कोरोना महामारी के बीच लैब टेक्नीशियन गोविंद अग्निहोत्री जिला अस्पताल में पिछले डेढ़ महीने से लगातार मरीजों की जांच कर रहे हैं। कोरोना संक्रमितों के बीच रहने के कारण उन्होंने अपने परिजनों से दूरियां बना ली हैं। सुबह से लेकर शाम तक मरीजों की जांच करते हैं। रात में घर पहुंचने पर एक कमरे में बंद हो जाते हैं। गोविंद का कहना है कि मरीजों की सेवा करने के लिए जान जोखिम में डालना मेरा कर्तव्य है। 

संक्रमित होने के बाद भी कर रहे मरीजों की मदद 
जिला अस्पताल में तैनात लैब टेक्नीशियन विमल कुमार खुद भी कोरोना संक्रमित हो गए थे, लेकिन इसके बाद भी ठीक होने पर वह पुन: ड्यूटी पर आ गए हैं। कोरोना संक्रमितों की जांच के लिए वह लगातार जिला अस्पताल में मेहनत कर रहे हैं। उनका कहना है कि मरीजों की जान बचाने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे। महामारी के बीच अपनों से दूरियां बनाकर मरीजों की सेवा करना ही मेरा धर्म और कर्तव्य दोनों हैं।

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