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UP: दो बेटे और एक बेटी, पांच पोते-पोतियां...फिर भी खा गया अकेलापन; वृद्धावस्था का ऐसा अंत...आप भी रो पड़ेंगे

Wed, 23 Apr 2025 01:48 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

ये कहानी है मैनपुरी की रहने वाली एक वृद्ध मां की, जो अकेलेपन की गहराई में डूब गई। दो बेटे, एक बेटी और पांच पोते-पोतियों से भरापूरा परिवार, फिर भी उसे अपनों का साथ न मिला, तो शायद उनके लिए जीनी जीवन का बोझ बन गया।
 
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वृद्धा का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मैनपुरी में उम्र के आखिरी पड़ाव में करपिया की 70 वर्षीय कमला देवी को जरूरत थी अपनों के साथ की। नाती-पोतों के साथ खेलने-खिलखिलाने की। बेटे-बहुओं के साथ सुख-दुख साझा करने की। मगर, बेटे भागदौड़ भरी जिंदगी, पैसा कमाने की लालसा में कमला को एकाकी कर गए। इस दुख को कमला सह न सकीं और फंदे से लटककर जीवन को मंगलवार शाम मौत के हाथों में सौंप दिया।
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एकाकीपन में जान देने वाली कमला के बेटे-बहू, नाती और रिश्तेदार फूट-फूटकर बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस और वहां से शव ले जाने के बाद गांव में रोने लगे। बेटे कोसने लगे उस घड़ी को जब मां को गांव के घर में रहने को छोड़ा था।

बेवर थाना क्षेत्र के करपिया गांव की 70 वर्षीय कमला देवी वैसे तो हर रोज सुबह-शाम घर के बाहर चहलकदमी करती थीं। मगर, मंगलवार को उनकी चहलकदमी न होते देख उनकी देवरानी मंजू उनके घर पहुंची। कमला का घर अंदर से बंद था। मंजू ने पति श्यामदास को बुलाया। दोनों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। एक बच्चे को बुलाया गया। उसने दरवाजे के दोनों पल्लों के बीच छोटी सी दरार में अपना हाथ फंसाकर कुंडी को खोला। 
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मंजू और श्यामदास घर में कमला को आवाज देते हुए तलाशने लगे। तलाशते हुए दूसरी मंजिल पर पहुंचे। वहां उनको टीन शेड में साड़ी के फंदे पर कमला देवी लटकी मिलीं। देवर-देवरानी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने गांव वालों और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने ग्रामीणों की मौजूदगी में शव को फंदे से उतारने के बाद पोस्टमार्टम हाउस भेजा। मृतका के बेटे अवनीश और रामानंद को सूचना दी। दोनों बेटे देर रात को अपनी पत्नी, बच्चों सहित आए। बुधवार को पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंपा। गमगीन माहौल में शाम के वक्त कमला देवी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।

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पहले बड़ा बेटा रामानंद और फिर छोटा अवनीश चला गया 
कमला देवी के पति बालकराम की बीमारी के चलते 2018 में मौत हो गई थी। बड़ा बेटा रामानंद कमाने के लिए पांच साल पहले पानीपत गया। वहां प्राइवेट नौकरी लगी तो अपनी पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी को भी साथ ले गया। इसके बाद छोटा बेटा अवनीश भी चार साल पहले दिल्ली गया। वहां उसकी नौकरी लग गई। इसके बाद पत्नी, दो बच्चों को अपने साथ ले गया था। 

कमला देवी की बेटी श्यामलता अंबरपुर, एलाऊ में अपनी ससुराल में रहती है। गांव वालों ने पुलिस को बताया कि कमला देवी की मौत की खबर ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। जिस मां के दो बेटे, एक बेटी और पांच पोते-पोतियों से भरा पूरा परिवार है, उसने अकेलेपन से आहत होकर जान दे दी। उसका शव घर में फंदे पर लटका मिलना शर्मनाक है।

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कमला देवी को होली पर गांव छोड़ गया था अवनीश
कमला देवी का बड़ा बेटा रामानंद पानीपत में परिवार सहित, वहीं छोटा पुत्र अवनीश दिल्ली में परिवार सहित रहता है। पिछले दिनों कमला देवी अवनीश के साथ दिल्ली में रहने के लिए गई थी। होली पर अवनीश वृद्ध मां को गांव छोड़ गया था। तब से वृद्धा अकेलेपन के चलते अवसाद में रह रही थी। गांव वालों ने बताया कि कमला देवी वृद्धावस्था के चलते कभी-कभी खाना भी नहीं बना पाती थी। बीमार भी रहती थी। 

मगर, शर्म के चलते वह गांव वालों से मदद नहीं मांगती थी। गांव वाले उन्हें खाना खाने की कहते तो भी वह हंसकर कहतीं थीं कि ईश्वर की कृपा से दोनों बेटे कमा रहे हैं। वह बहुत सारा राशन-पानी भरा देते हैं। अगर, गांव वालों के यहां खाने लगी तो घर का राशन खराब हो जाएगा। कभी-कभी गांव में ही रहने वाले देवर श्यामदास और देवरानी मंजू के घर पर मन बहलाने के लिए चली जातीं थीं। मगर, उन्होंने किसी को यह एहसास नहीं होने दिया कि वह इतने गहरे अवसाद में जा चुकीं हैं कि जान देने वाली हैं।

सीओ भोगांव सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि गांव वालों से पता लगा है कि कमाल देवी ने एकाकीपन से परेशान होकर आत्महत्या की है। सच में दिल झकझोर देने वाली घटना है। 


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