शहर के बीचोंबीच स्थित कब्रिस्तान की बेशकीमती जमीन पर बड़ा खेल कर कब्जा कर लिया गया। इसमें तत्कालीन लेखपाल समेत अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं। शिकायत होने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। अब एसडीएम ने नोटिस जारी कर संबंधित पक्ष को तलब किया है लेकिन वह उनके सामने उपस्थित नहीं हो रहा है।
शहर के प्रमुख भांवत चौराहे के पास एक जमीन है। इसका क्षेत्रफल राजस्व विभाग के कागजों के अनुसार लगभग 119 एकड़ है। इसमें 59 खाते शामिल हैं। सन 1990 तक यह जमीन कागजों में कब्रिस्तान के रूप में ही दर्ज रही। उसके बाद तत्कालीन लेखपाल चेतराम ने भांवत चौराहे के पास स्थित उक्त भूमि का भूउपयोग फर्जी रूप से बदलते हुए इसका पट्टा अपने और अन्य परिवारीजनों के नाम कर लिया। आरोप है इस मामले की जानकारी खरपरी निवासी वीरपाल सिंह को हो गई। इस पर उन्होंने उक्त भूमि में से कुछ का पट्टा अपने नाम करा लिया और उस पर कब्जा कर लिया। तब से लेकर अब तक उक्त जमीन पर तमाम लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर पक्के निर्माण करा लिए हैं।
पिछले वर्ष जब राधारमन रोड फोरलेन हुई। तब इस मामले की शिकायत शासन से की गई। इसके बाद भी अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। पिछले दिनों इसकी शिकायत एक बार फिर स्थानीय अधिकारियों से लेकर शासन तक से की गई। इसके बाद अधिकारियों ने जांच कराई तो शिकायत सही मिली। इसके बाद से अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
इस संबंध में एसडीएम सदर अमित सिंह का कहना है कि उक्त कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध कब्जे मिलने की शिकायत मिली है। जांच में प्रथम दृष्ट्या शिकायत सही प्रतीत हो रही है। इस संबंध में वीरपाल सिह और राजेश चौहान को नोटिस जारी किए गए हैं। अभी तक राजेश चौहान एक बार भी पेश नहीं हुए हैं। अब उनके घर पर नोटिस चस्पा करने की तैयारी चल रही है।
नहीं बदल सकता भूउपयोग
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कब्रिस्तान, तालाब, पोखर, हरित पट्टिका आदि में दर्ज भूमि का उपयोग किसी भी सूरत में बदला नहीं जा सकता है। ऐसे में कब्रिस्तान की भूमि का तत्कालीन लेखपाल ने अवैध रूप से अपने और अपने परिवार के नाम पट्टा काट दिया। जोकि पूर्णत: अवैध है। यही नहीं अन्य लोगों को भी उसमें हिस्सेदार बना लिया।
1348 फसली वर्ष में दर्ज है कब्रिस्तान
भांवत चौराहा के पास स्थित उक्त भूमि सरकारी रिकार्ड में 1348 फसली वर्ष तक कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। उसके बाद राजस्व अभिलेखों में 1419 फसली वर्ष में उक्त भूमि को लेखपाल चेतराम स्वयं अपने और चार अन्य परिवारीजनों के नाम दर्ज कर ली।