बरनाहल। मानसून सत्र में मुख्यमंत्री ने किसानों को पर्याप्त खाद देने के आदेश दिए हैं। किसी भी तरह से किसानों को परेशान करने, खाद की कालाबजारी करने और ओवररेट खाद बेचने पर कड़ी पाबंदी के आदेश दिए, इसके बाद भी किसान खाद के लिए परेशान हैं। इस समय खरीफ की फसलों का समय चल रहा है। किसान धान, मक्का और बाजरा की फसल के लिए खाद लेने को सहकारी समितियाें के चक्कर काट रहा है। समितियां पर खाद तो है लेकिन समितियों पर बैठने वाले अधिकारियों के नियम, कायदा और कानून के आगे किसान लाचार हैं।
मंगलवार को की गई पड़ताल में पता चला कि सहकारी समिति बरनाहल और डालूपुर की समितियाें पर यूरिया और डीएपी पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन सहकारी समिति डालूपुर पर बायोमेट्रिक मशीन खराब हो जाने के कारण खाद का वितरण बंद था। सहकारी समिति बरनाहल पर किसान फार्मर रजिस्ट्री और खाद के साथ लगेज में नैनो यूरिया साथ में देने के कारण किसान लाचार नजर आए।
सहकारी समितियों पर मौजूद किसानों ने बताया कि सहकारी समिति बरनाहल पर यूरिया का वितरण हो रहा है, लेकिन किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के बिना खाद नहीं मिल रही है। साथ में खाद के साथ नैनो यूरिया का लगेज लगाकर किसानों को दिया जा रहा है।
यूरिया की एक बोरी 280 रुपये की मिल रही है। साथ में नैनो यूरिया का लगेज लगाकर किसानों को दिया जा रहा है। बिना फार्मर रजिस्ट्री के समितियों पर खाद नहीं मिल पा रही है।
रवि कुमार, अढूपुर
-
समितियों पर खाद के साथ लगेज दिया जा रहा है। किसान की फार्मर रजिस्ट्री भी होना जरूरी है। इसके बिना किसान परेशान हैं। समितियों पर किसान को खाद नहीं मिल रही है।
संजेश कुमार, बरैहया
समितियों पर खाद की बोरी के साथ कोई लगेज नहीं दिया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री के संबंध में कुछ जवाब दिए बिना ही मोबाइल काट दिया और बाद में नहीं उठाया।
वीरी सिंह, सचिव