उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में सोमवार को अदालत ने 20 साल पहले हुई विवाहिता की हत्या के मामले की सुनवाई की गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दहेज हत्या की आरोपी सास, ननद तथा देवर की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। सुनवाई अपर जिला जज प्रथम मुनव्वर जहां की अदालत में हुई। जेठ की दो सप्ताह पहले अग्रिम जमानत खारिज हो चुकी है। घटना घिरोर थाना क्षेत्र के नगला बाग की है।
सुनीता की मौत के बाद उच्चाधिकारियों के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट तो लिखी, लेकिन मामले को झूठा बताकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। सुनीता के पिता की शिकायत पर सीजेएम ने दोबारा जांच के आदेश दिए तो दोबारा भी पुलिस ने जांच के नाम पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पातीराम की शिकायत पर तीसरी बार जांच के आदेश हुए तो आरोपियों ने लाखनऊ जाकर सीबीसीआईडी जांच के आदेश कराए। सीबीसीआईडी ने भी मामले को झूठा बताकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
पुत्री की दहेज की खातिर हत्या करने वालों को सजा दिलाने के लिए पातीराम ने हार नहीं मानी है। सीबीसीआईडी की फाइनल रिपोर्ट के बाद पातीराम ने सीजेएम न्यायालय में अभिलेखों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सीजेएम के आदेश के बाद न्यायालय में हाजिर हुए सास, देवर, ननद, जेठ की अग्रिम जमानत खारिज हो चुकी है।