मैनपुरी/बरनाहल। मानसून की बेरुखी और भीषण गर्मी के बीच अचानक बढ़ी बिजली की कटौती ने किसान ही नहीं आम आदमी को मुसीबत में डाल दिया है। 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति मिलने वाले जिले में बमुश्किल 12-14 घंटे बिजली मिल पा रही है। देहातों में तो आठ घंटे बिजली मिलना भी मुश्किल हो गया है। बिजली कटौती के विरोध में बरनाहल क्षेत्र के 20 ग्रामों के किसानों ने एक बार फिर करहल-सिरसागंज रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस के कड़े तेवरों के बाद करीब पांच घंटे बाद जाम खुल सका।
बरनाहल क्षेत्र के 20 गांव के किसानों ने बिजली कटौती के विरोध में सात सितंबर को करहल-सिरसागंज रोड पर जाम लगाया था। बाद में एसडीएम और विद्युत अधिकारियों द्वारा बिजली आपूर्ति सुचारु कराए जाने पर जाम खोला गया था। दो दिन बीतने के बाद भी आपूर्ति में सुधार तो दूर कटौती का समय और बढ़ गया। इससे ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। वहीं अफवाह यह भी फैली के सात सितंबर को जाम लगाने के मामले में अवर अभियंता विद्युत ने क्षेत्र के कई किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है। इससे आक्रोशित 20 गांव के 300 से अधिक किसान और युवक बुधवार सुबह सात बजे करहल-सिरसागंज रोड पर पहुंच गए और प्रशासन एवं विद्युत अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मोहब्बतपुर चौराहे पर जाम लगा दिया। सड़क पर पेड़ों की डालियां काटकर डाल दीं और एक ट्रक को सड़क के बीच में खड़ा करा दिया। इससे करहल-सिरसागंज रोड पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। ग्रामीण किसानों का कहना था कि बारिश के अभाव में खेतों में फसलें सूख रही हैं और बिजली न के बराबर आ रही है। बिजली कटौती के विरोध में जमकर नारेबाजी की। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची बरनाहल और करहल पुलिस की ग्रामीणों ने एक न सुनी। बाद में चार थानों का पुलिस बल, पीएसी लेकर एसडीएम करहल विजय प्रताप, सीओ करहल तेजपाल सिंह और सीओ कुरावली बीपी सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और पुलिस के काफी समझाने पर भी ग्रामीण जाम खोलने को राजी नहीं हुए। बाद में मौके पर पहुंचे अधिशासी अभियंता राजवीर ने प्रदेश में बिजली संकट का हवाला देते हुए मीठेपुर और दिहुली क्षेत्र में 12-12 घंटे आपूर्ति दिए जाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी किसान के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। इसी बीच कुछ युवकों ने ट्रकों में आग लगाने की बात कही तो हालात बिगड़ने लगे। इससे प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। हालांकि बाद में पुलिस की सख्ती से किसानों ने जाम खोल दिया। लाठीचार्ज की आशंका पर ग्रामीण खेतों की तरफ भाग निकले। करीब 12 बजे जाम खुल सका।
जाम में फंसे लोग गर्मी में हुए बेहाल
लगातार पांच घंटे तक जाम रहने से करहल-सिरसागंज मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं। करहल से सिरसागंज की ओर जाने वाले वाहन तो पांच घंटे तक जहां के तहां फंसे रहे। सिरसागंज से करहल की ओर जाने वाले कुछ वाहन उखांड़-बरनाहल होते हुए निकले। जाम और गर्मी के चलते महिलाओं और बच्चों को खासी परेशानी उठानी पड़ी।
60 फीसदी धान की फसल पर संकट गहराया
बारिश नहीं होने और भीषण गर्मी के कारण खरीफ की फसलें चौपट होनी शुरू हो गईं हैं। करीब 60 फीसदी धान की फसल पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। किसानों का कहना है कि नहर-रजबहा के किनारे धान की फसल तो बच जाएगी लेकिन बाकी की धान की फसल चौपट हो सकती है। किसान राजवीर सिंह का कहना था की रबी की फसल के बाद अब खरीफ की फसल भी चौपट होती दिख रही है। सरकार को चाहिए कि गांवों में बिजली की आपूर्ति बढ़ाए जाने की व्यवस्था की जाए।