जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ा सकती है। आदेश के बाद कार्यकत्री खुश हैं। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग करते हुए लखनऊ तक आंदोलन किए हैं। अगर सब कुछ सही रहा तो आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मानदेय बढ़ाने की मांग शीघ्र ही पूरी होगी।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने के लिए यूपी स्टेट आंगनबाड़ी इंपलाइज एसोसिएशन ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में रिट की थी। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वीके शुक्ला और एमसी त्रिपाठी ने रिट की सुनवाई के बाद शासन के प्रमुख सचिव को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने पर गंभीरता पूर्वक विचार करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाए जाने की संभावना बढ़ गई है। मानदेय कितना बढ़ेगा इससे ज्यादा खुशी उनको मांग पूरी हो जाने की है। आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिका वेलफेयर एसोसिएशन की सदस्य सरोज, सुशीला, मनोरमा, विमलेश, सुषमा आदि का कहना है कि अगर सरकार चाहती तो काफी पहले ही उनका मानदेय बढ़ा सकती थी।
3200 मानदेय पर कर रही काम
मैनपुरी। जिले में 1788 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन पर 1788 कार्यकत्री तथा सहायिकाएं कार्यरत हैं। दोनोें को 3200 रुपया मानदेय दिया जाता है। इसी मानदेय पर वह काम करती हैं। इनसे बीएलओ, पोलियो कार्यक्रम, इंद्रधनुष कार्यक्रम, टीकाकरण, आधारकार्ड, जनगणना, जाति गणना का काम भी लिया जाता है।
केंद्रों पर 23 दिन से लटक रहा ताला
मैनपुरी। जिले की आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिकाएं 11 जुलाई से आंदोलन कर रही हैं। तिकोनिया पार्क में आंदोलन के चलते जिले के 1788 केंद्रों पर 23 दिनों से ताला लटका है। जिससे हौसला पोषण मिशन सहित कई योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
23वें दिन भी धरना जारी
मैनपुरी। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का तिकोनिया पार्क में 23वें दिन भी धरना जारी रहा। जिलाध्यक्ष सरिता शाक्य के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में शामिल सभी कार्यकत्री और सहायिकाएं मांगें पूरी न होने तक धरना जारी रखने का ऐलान कर चुकी हैं।
देश के कई अन्य राज्यों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को उत्तर प्रदेश से बेहतर मानदेय मिल रहा है। यहां मिलने वाले मानदेय से परिवार चलाना तो दूर बीमार होने पर इलाज तक नहीं कराया जा सकता है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद जगी है।
सरिता शाक्य, प्रदेश उपाध्यक्ष/जिलाध्यक्ष
आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिकाएं अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाती हैं। उनको एक मजदूर से भी कम मानदेय दिया जाता है। जबकि मनरेगा मजदूर को सरकार एक दिन की मजदूरी 171 रुपया देती है। मानदेय तो बढ़ाया जाना ही चाहिए।
विमलेश चौहान, जिला महासचिव