कस्बा स्थित अजोम कुंड बदहाल है। जबकि 15 अप्रैल से यहां पर प्राचीन मेला लगने वाला है। मंदिर और कुंड की हालात देख लोगों में रोष है। वहीं कई बार कहने के बाद भी अधिकारी कुछ भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
मैनपुरी में 88 हजार ऋषिमुनियों की तपोस्थली औंछा मेें ब्रह्माजी के नाती च्यवन ऋषि का आश्रम है। कहा जाता है कि च्यवन ऋषि ने औंछा में हजारों वर्ष तपस्या की। इससे उनके शरीर पर दीमक ने बामी बना ली थी। उसी दौरान अयोध्या के राजा शर्यत औंछा के जंगल में शिकार खेलने आए। इसी दौरान उनकी बेटी सुकन्या से ऋषि की आंख फूट गई। राजा सजा के रूप में सुकन्या को औंछा के जंगल में च्यवन ऋषि की सेवा के लिए छोड़ गए। वहीं सुकन्या की सेवा से खुश होकर च्यवन ऋषि ने वरदान मांगने को कहा तो सुकन्या ने उन्हें 18 वर्ष का युवक बनने के लिए कहा। इस पर महाऋषि ने देवताओं के वैद्य अश्वनी कुमार को बुला कर च्यवन ऋषि मंदिर के पीछे बने 62 बीघा के अजोम कुंड में देवताओं के अमरवती बाग से जड़ी बूटियों से च्यवनप्राश का निर्माण कराया। उसे खाने से च्यवनऋषि जवान हो गए। इन औषधियों को खाने के बाद इसी अजोम कुंड में डाला गया। मान्यता है कुंड में काई व मेढ़क नहीं मिलते थे। तीन वर्ष पूर्व अराजकतत्वों ने अजोम कुंड में कमल की बेल डाल दी। इससे कुंड में कमल की बेल व अन्य घास बड़ी मात्रा में हो गया। कुंड की खोदाई न होने व जल की कमी के कारण ही यह बदहाली के कगार पर पहुंच गया है। लोगों का कहना है कि कमल की बेल और जल की कमी के चलते 15 तारीख से लगने वाले मेले में श्रद्धालु कहां स्नान करेंगे।
मंदिर की दीवार में पड़ी दरार
औंछा। च्यवन ऋषि मंदिर की दीवार में दरार व फर्श में गड्ढा हो गया है। ऐसे में 15 अप्रैल को लगने वाले लक्खी मेला में कोई अप्रिय घटना न हो जाए। इसको लेकर ग्रामवासी आशंकित हैं। उन्होंने अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। च्यवन ऋषि मंदिर पर 15 अप्रैल को रामनवमी का लक्खी मेला लगेगा। इसमें दूर दूर से कांवड़ व घंटा चढ़ने लोग आते है। कुछ वर्ष पूर्व मंदिर की गुम्मद टूटने से हादसा होने से बच गया था। इस वर्ष मंदिर की छत की बाउंड्री टूट गई है। वहीं मंदिर के अंदर हनुमान जी की मूर्ति के पास दीवार चटक गई है।