मैनपुरी। दैवी संपद मंडल शताब्दी महोत्सव के तहत श्री एकरसानंद नगर में धार्मिक आयोजनों की धूम मची हुई है। सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालु आकर धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। सुबह पांच बजे महामंडलेश्वर शारदानंद सरस्वती द्वारा कराए गए महारुद्राभिषेक में भाग लेकर श्रद्धालुओं ने भगवान आशुतोष को प्रसन्न कर मनोकामना पूर्ण करने की कामना की। शतमुख कोटि हरिहरात्मक महायज्ञ में 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं और करीब 15 हजार लोगों ने यज्ञशाला की परिक्रमा कर मनौतियां मांगी। कथा पंडाल में श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण और रुक्मणी के विवाह के प्रसंग कर रसपान किया। संत सम्मेलन में देश के प्रकांड विद्वान और संतों के प्रवचन को श्रद्धालु आत्मसात करते नजर आए। शाम को बाबा सत्यनारायण मौर्य, मथुरा से आईं हेमलता और अन्य भजन गायकों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।
गुरुवार को सुबह साढ़े चार बजे से ही श्री एकरसानंद नगर में श्रद्धालुओं का उमड़ना शुरू हो गया था। सुबह पांच बजे से साढ़े सात बजे तक गुरुदेव कुटीर में मंडल के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी शारदानंद सरस्वती द्वारा महारुद्राभिषेक में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव से विघ्नों के निवारण की कामना की। स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, सर्वानंद, शर्वेश्वरानंद, बैनी बाबू, सांबरिया शर्मा, सुभेश शर्मन, राम किशन गोयल, दिनेश पांडेय, कृष्णा शर्मा, हरिओम मिश्रा, शारदा देवी, स्वतंत्रता मिश्रा, ज्ञानवती मिश्रा, डाक्टर एसएस मिश्रा, ब्रजेश शास्त्री, गिरधारीलाल अग्रवाल आदि शामिल रहे। यज्ञशाला में राष्ट्र की समृद्धि के लिये शतमुख कोटि हरिहरात्मक यज्ञ के तहत यज्ञाचार्य पंडित शशिधर झा, उपद्रष्ठा रवींद्र नाथ पंत, उपाचार्य शुभेश शर्मन, रमाकांत मिश्र, मायापति श्रीराम तिवारी के निर्देशन में मुख्य यजमान ब्रजेश अग्रवाल के साथ 500 से अधिक यजमानों ने वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ में आहुतियां दीं। कुछ यजमानों ने विशेष विधि से बने कुंडों पर श्री समृद्धि पुत्र कामना और कष्ट निवारण के लिए विशेष सामग्री से हवन किया। यज्ञ के समापन पर शारदानंद सरस्वती ने यजमानों को प्रसाद और आशीर्वाद दिया।
कृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग में झूमे श्रद्धालु
कथा पंडाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य सच्चिदानंद शास्त्री ने कहा कि मनुष्य कठपुतली की तरह है। उसे परमात्मा जैसा नचाना चाहते हैं वैसा ही नाचता है। उन्होंने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की मनोहारी कथा को बड़े ही आकर्षक ढंग प्रस्तुत किया। भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग आते ही श्रद्धालु झूम उठे। भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के स्वरूप की आरती उतारने और पूजा करने की श्रद्धालुओं में होड़ लग गई। गुरुवार को आचार्य सच्चिदानंद शास्त्री ने भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि रुक्मिणी का भाई उनकी इच्छा के विरुद्ध जरासंध से रुक्मिणी की शादी करना चाहता था। रुक्मिणी ने पत्र के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण तक अपनी टेर पहुंचाई कि हे कृष्ण मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हीं से विवाह करना चाहती हूं। कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण करके समाज में इस विचार को रखा कि महिला के भी सम्मान स्वाभिमान और उसकी चाहत की रक्षा होनी चाहिए। रुक्मिणी विवाह की झांकी आने पर पुष्प वर्षा के साथ स्वागत हुआ। यजमान उदयवीर सिंह राठौर, शकुंतला राठौर, चेयरमैन साधना गुप्ता, अनु राठौर, अरुण गुप्ता, स्वामी सर्वेश्वरानंद, शुभेश शर्मन, गिरधारीलाल अग्रवाल, यज्ञ यजमान ब्रजेश अग्रवाल, ब्रजेश शास्त्री, सांवरिया शर्मा, कुंजीलाल आदि ने नृत्य कर विवाह की खुशी में भागीदारी की।
भागवत कथा में सुदामा चरित्र आज
एकरसानंद नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को सुदाम चरित्र की कथा होगी। यह जानकारी डाक्टर संजीव मिश्र ने दी है।
स्वामी एकरसानंद का डाक टिकट जारी
दैवी संपद मंडल के सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजित शताब्दी महोत्सव में मंडल के संस्थापक स्वामी श्री एकरसानंद सरस्वती का डाक टिकट मुख्य आतिथि महा डाकपाल तनवीर अहमद, निर्वाण पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद सरस्वती और विहिप के अंतरर्राष्ट्रीय महामंत्री दिनेश की उपस्थिति में जारी हुआ।
स्वामी हरिहरानंद ने कहा कि शताब्दी महोत्सव की पहली बैठक में ही डाक्टर एके जैन ने डाक टिकट के लिये प्रयास करने का सुझाव दिया था। जिसे अपने प्रयासों से पूर्णता तक पहुंचाने का काम भाई दिनेश के ही व्यक्तिगत रुचि लेने से संभव हो सका। दिनेश जी ने कहा कि पहला डाक टिकट एक अक्तूबर 1854 को जारी हुआ था। डाक टिकट किसी भी देश की संस्कृति, सभ्यता की एक बानगी की तरह होते हैं। इस मौके पर निदेशक आगरा मण्डल विनोद कुमार, आचार्य डाक्टर ग्याप्रसाद दुबे, आनंदस्वरूप अग्रवाल, चेयरमैन साधना गुप्ता, हरी बजाज, अनिल गुप्ता, अरुण गुप्ता, महेश चंद्र अग्निहोत्री, डाक्टर संजीव मिश्र, घनश्यामदास गुप्ता, मुकुल अग्रवाल, बैनी गुप्ता, गिरधारी लाल अग्रवाल आदि मौजूद थे।