मैनपुरी। नोबोल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि बच्चों पर जहां भी जुल्म हो उसके खिलाफ आवाज जरूर उठाएं। बच्चों को न पढ़ाना भी हिंसा है। उनकी इस बात का शायद जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि, समाजसेवी संगठन या आम आदमी पर कोई असर नहीं हुआ। तभी तो मंगलवार को अन्य दिनों की तरह की बच्चे मजदूरी करते दिखे। वहीं हाउस होल्ड सर्वे के अनुसार जिले में अभी भी लगभग 12 सौ बच्चे स्कूल नहीं जाते।
मंगलवार को शहर में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर बच्चे मजदूरी करते दिखे। इनमें बच्चे ढाबों, दुकानों के अलावा राजमिस्त्री के संग मजदूरी भी कर रहे थे। जब इन बच्चों से स्कूल जाने के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि पहले पेट भरने के लिए तो कमा लें। पढ़ने जाएंगे तो फिर कमाएंगे कब। इस संबंध में प्रयास संस्था के अध्यक्ष विनय सोती का कहना है कि जिले में खुलेआम बालश्रम हो रहा है। श्रम विभाग के अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे हुए बैठे हैं। आलम यह है कि अधिकारियों से पूछने पर उनका जवाब होता है कि जिले में एक भी बाल श्रमिक नहीं है। वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियरंजन आशु दिवाकर का कहना है कि बालश्रम एक अभिशाप है। इसको समाप्त करने के लिए सरकारी मशीनरी के साथ ही समाजसेवियों और आम लोगों को भी आगे आना होगा। इसके लिए ठोस प्रयास करने की जरूरत है। वहीं समाजसेवी प्रमोद दुबे बाबा का कहना है कि बालश्रम समाप्त न होने के पीछे अधिकारियों की अकर्मण्यता मुख्य वजह है। वे लोग कार्रवाई के स्थान पर कागजी आंकड़े बनाने में ज्यादा मेहनत करते हैं। यही कारण है कि जिले से बालश्रम समाप्त नहीं हो पा रहा है और सैकड़ों बच्चे स्कूल जाने से वंचित हैं।