कबरई (महोबा)। भगवान विष्णु ने वामन के अवतार लेने के
बाद राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी थी। राजा बलि ने भगवान से अपने महल में
दर्शन के लिए वरदान स्वरूप रोक लिया और भगवान चौकीदारी करने लगे।
जब
लक्ष्मी जी ने राजा बलि को राखी तो चौकीदारी स्वरूप में भगवान को पाया।
कस्बे के इंदिरा नगर स्थित मोहल्ले में कथा सुनाते हुए पंडित सुशील महराज
ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि राजा बलि के यहां जाकर भगवान ने
उनकी परीक्षा लेने के लिए तीन पग जमीन दान में मांगी। राजा बलि ने तीन पग
जमीन देने की हामी भर ली।
भगवान वामन स्वरूप ने पहले पग में पाताल
और दूसरे पग में आकाश को नाप लिया। तीसरे पग की जमीन न देख भगवान ने राजा
बलि के सिर पर अपना तीसरा पग रख दिया। राजा ने भगवान से प्रार्थना कर वरदान
मांगा कि मेरे महल में सात दरवाजे हैं, मेरी इच्छा है कि मैं जिस दरवाजे
से भी निकलूं, भगवान के दर्शन हों।
भगवान ने वचन दे दिया। सभी
दरवाजों में हर समय दर्शन के लिए मौजूद रहने की मांग पूरी करने के लिए
भगवान को राजा के यहां सातों दरवाजों में चौकीदार बनकर रहना पड़ा।
भगवान
के विष्णु लोक से नदारद होने पर लक्ष्मी जी चिंतित हो गईं। तब नारद ने
राजा बलि के यहां भगवान के चौकीदारी की बात बताई। लक्ष्मी जी राजा बलि के
यहां रक्षाबंधन के दिन बहन बनकर गईं।
राखी बंधाई के रूप में
चौकीदार को मांग लिया। तब भगवान लक्ष्मी के साथ अपने लोक जा सके। कथा वाचक
ने राम जन्म और कृष्ण जन्म की कथा सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया।
इस
मौके पर आयोजक दिलीप गुप्ता, बाबूलाल गुप्ता, रामजी गुप्ता, हिमांशु,
पुरुषोत्तम, रविकांत रामायणी, साधना तिवारी, मनीष सेठ, अनिल जैन, राकेश
गुप्ता सहित तमाम लोग मौजूद रहे।