मामले की जानकारी देते बच्चों के परिजन। संवाद
- फोटो : मामले की जानकारी देते बच्चों के परिजन। संवाद
महोबा। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में सोमवार की रात पहले से भरकर रखे गए इंजेक्शन लगाने से आठ बच्चोंं की हालत बिगड़ गई। तेज बुखार, कंपकंपी और उल्टी होने पर परिजन घबरा गए। सूचना पर पहुंचे डॉक्टर ने बच्चोंं का इलाज किया। तब छह घंटे बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। सीएमएस की जांच में सामने आया कि स्टाफ नर्स ने सेफ्टि्रकसोन इंजेक्शन पहले से सीरिंज में भरकर रख लिया था। इससे दवा में रिएक्शन हुआ और बच्चोंं की हालत बिगड़ी।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में कस्बाथाई निवासी भूमि, धरौन निवासी सौरभ, भटीपुरा निवासी प्रेमचंद्र, अस्थाैन निवासी अनुष्का, किदवईनगर कबरई निवासी शिवकांत, अजनर निवासी रितिक समेत अन्य बच्चे भर्ती थे। रात करीब दस बजे से स्टाफ नर्स ने बच्चों को इंजेक्शन लगाए तो उनकी हालत बिगड़ने लगी। सूचना पर पहुंचे सीएमएस ने जांच की तो बच्चा वार्ड में सीरिंज में पहले से भरे इंजेक्शन मिले। इस पर सीएमएस ने कड़ी नाराजगी जताते हुए दोबारा ऐसी गलती न करने के निर्देश दिए।
शिवकांत की मां भूरी ने बताया कि बेटे को बुखार आने पर दोपहर में भर्ती कराया था। बेटा बोतल लगने तक सही था। बाद में दो इंजेक्शन लगने के बाद सर्दी के साथ तेज बुखार आ गया। अस्थौन निवासी खुशबू ने बताया कि बेटी अनुष्का को बुखार आने पर भर्ती कराया। रात को एक इंजेक्शन लगने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. शाजी राहील ने बच्चोंं का इलाज किया। तब उनकी हालत में सुधार हुआ।
इंजेक्शन लगने के बाद छह बच्चों को ठंड के साथ बुखार आ गया था। इससे मरीजों के परिजन घबरा गए थे। तब डाॅक्टर को भेजकर बच्चों का इलाज कराया गया। दो बच्चे भर्ती है जबकि चार की छुट्टी कर दी गई है। ऐसा लगता है कि स्टाफ नर्स ने काफी देर पहले इंजेक्शन सीरिंज में भर लिए थे। इससे बच्चों को रिएक्शन हुआ। स्टाफ नर्स संगीता सोनी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य कर्मियोंं को फ्रेश इंजेक्शन लगाने के निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. पीके अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल महोबा।