महोबा। 838 साल बाद पहली दफा ऐतिहासिक कजली मेले का लोग आनंद नहीं ले सकेंगे। दूर दराज से मेले में जुटने वाली भीड़ भी इस बार नजर नहीं आएगी। कोरोना संक्रमण के चलते मेले को लेकर तैयारियां शुरू नही की गई है। जिससे एक सप्ताह तक चलने वाले ऐतिहासिक मेले के आयोजन के आसार नहीं दिख रहे हैं।
उत्तर भारत के मशहूर कजली मेले का आयोजन इस दफा नहीं लगेगा। कारण, वैश्विक कोरोना महामारी के चलते सामूहिक आयोजनों पर रोक लगी है। यही वजह है कि पालिका प्रशासन ने इस बार बोर्ड की बैठक में न तो कजली मेले का न तो बजट स्वीकृत किया और न ही मेले के आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। कजली मेला मैदान में सब्जी की फुटकर और दुकानें लगाई जा रही हैं। हालांकि कुछ लोग अभी भी इसके आयोजन की उम्मीद लगाए हैं।
चार अगस्त से कजली मेले की शुरुआत होनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते मेला आयोजनों के प्रति प्रशासन ने रोक लगा दी है। उधर, कजली मेले से डेढ़ माह पहले स्वीकृत होने वाले मेला बजट को भी पालिका प्रशासन ने अभी तक स्वीकृत नहीं किया है और न ही दूर दराज से आने वाले कलाकारों, झूला संचालकों और बड़े बड़े दुकानदारों को भेजने के लिए कार्ड छपवाए हैं। कजली मेले की तैयारियों के नाम पर पालिका प्रशासन भी चुप है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लालचंद्र सरोज का कहना है कि भीड़ जुटने वाले आयोजनों पर शासन की रोक के चलते इस दफा कजली मेले का आयोजन मुश्किल दिखाई दे रहा है, फिर भी जिले के आलाधिकारियों की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं।