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पर्यावरण प्रेमी बने प्रधानाचार्य, चारों ओर हरियाली से लहलहा रहा जीआईसी

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महोबा। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो हर मंजिल आसान हो जाती है। इन पंक्तियों को जीआईसी का प्रधानाचार्य पीसी अनुरागी ने सच साबित कर दिखाया। पेड़-पौधों से लगाव को देखते हुए 2014 में उन्होंने कॉलेज परिसर को हराभरा करने की ठानी। आज कॉलेज परिसर में विभिन्न प्रजातियों के डेढ़ हजार पौधे हरियाली बिखेर रहे हैं। पौधों की देखरेख व संरक्षण का काम वह स्वयं कर रहे हैं। जिससे महोबा जीआईसी जिले के अन्य कॉलेजों के लिए मॉडल बन गया।
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उन्होंने बताया कि 2005 में उत्तराखंड में प्रधानाचार्य थे। वहां भी वह पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी रहे। बताया कि वर्ष 2014 में जीआईसी के प्रधानाचार्य पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कॉलेज परिसर को हरा-भरा करने की ठानी। शुरुआती दौर में पीपल, बरगद, पाखड़ व नीम के एक सैकड़ा पौधे लगाए। जिनकी लंबाई अब 25 से 30 फीट तक हो गई है। इसके अलावा कॉलेज परिसर में मौसमी फल, फूल समेत विभिन्न प्रजातियों के डेढ़ हजार पौधे रोपित किए गए। उनकी मेहनत और लगन से इस समय पूरा जीआईसी परिसर हरियाली से लहलहा रहा है। सप्ताह में एक दिन पर्यावरण संरक्षण का कार्यक्रम चलता है।
अवकाश व कोरोना संक्रमण काल में भी वह प्रतिदिन सुबह-शाम कॉलेज जाकर स्वयं पौधों को पानी देते हैं। प्रधानाचार्य की मेहनत और प्रयास को देखकर जीजीआईसी महोबा व जीजीआईसी पनवाड़ी के प्रधानाचार्य भी कॉलेज परिसर में वृहद पौधरोपण कराकर हरा-भरा बनाने की मुहिम तेज कर दी है।
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किचन गॉर्डन की सब्जी से बनता मिड-डे-मील
महोबा। कॉलेज परिसर में पौधरोपण के साथ किचन गॉर्डन भी लगाया गया है। कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के लिए तैयार होने वाले मिड-डे-मील के लिए बाजार से सब्जी नहीं खरीदी जाती है बल्कि कॉलेज परिसर में लगे किचिन गॉर्डन की सब्जी का ही प्रयोग होता है। प्रधानाचार्य ने बताया कि किचन गॉर्डन में लौकी, तरोई, कद्दू, कटहल, बैगन, धनिया, मिर्च के अलावा मौसमी फलों के पेड़ लगे हैं। जो हर मौसम में फल आने पर बच्चों को दिए जाते हैं।
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