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बीस साल से चुनावी जंग में ‘बाहरी’ पास

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महोबा। बुंदेलखंड के मिनी कश्मीर नाम से विख्यात चरखारी विधानसभा में मतदाताओं को स्थानीय नेता से ज्यादा बाहरी पर एतबार है। यही वजह है कि इनका दुलार बीस साल से बाहरी प्रत्याशी को ही मिल रहा है। कोई स्थानीय नेता विधायक नहीं बन पाया। हालांकि हर विधानसभा चुनाव में स्थानीय प्रत्याशी की मांग जरूर जोर पकड़ती है।
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चरखारी विधानसभा में पिछले चार चुनाव के परिणाम देखें तो पहले और दूसरे स्थान पर कोई स्थानीय प्रत्याशी नहीं रहा। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में राठ निवासी सपा की अंब्रेश कुमारी विजयी रहीं जबकि भाजपा की महोबा निवासी पुष्पा अनुरागी दूसरे स्थान पर थीं। वर्ष 2007 के चुनाव में राठ निवासी बसपा प्रत्याशी विजेता बने, दूसरे स्थान पर राठ की अंब्रेश कुमारी रहीं।
वर्ष 2012 के चुनाव में मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा की फायर ब्रांड नेता टीकमगढ़ निवासी उमा भारती विजयी रहीं। उन्होंने उरई निवासी सपा प्रत्याशी कप्तान सिंह राजपूत को हराया। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़े उरई निवासी बृजभूषण राजपूत जीते। उनके चाचा उरई निवासी सपा के कप्तान सिंह राजपूत दूसरे स्थान पर रहे।
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यही नहीं वर्ष 2014 में उमा भारती के इस्तीफे के बाद उपचुनाव हुआ। जिसमें उरई के कप्तान सिंह राजपूत विजयी हुए। एक मामले में उन्हें सजा होने पर दोबारा उपचुनाव हुआ। इसमें उनकी पत्नी उर्मिला राजपूत विजयी रहीं। अब इस बार के चुनाव में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से स्थानीय व बाहरी दोनों तरह के प्रत्याशी चरखारी विधानसभा से टिकट मांग रहे हैं।
अब देखना यह है कि इस चुनाव में भी बाहरी प्रत्याशी का दबदबा रहेगा या स्थानीय प्रत्याशी को मौका मिलेगा।
कुलपहाड़ निवासी महेंद्र अहिरवार का कहना है कि चरखारी विधानसभा वर्ष 2012 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही। इस सीट पर अधिकांश नेता हमीरपुर जिले के ही विजयी होते रहे। सामान्य सीट होने के बाद भी यह स्थिति नहीं बदली। कोई स्थानीय नेता विधायक नहीं बन सका।
कुलपहाड़ के रमाकांत मिश्रा कहते हैं कि चुनाव में स्थानीय व बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा कभी नहीं रहा। हर चुनाव में जातिवाद ही हावी रहा। अधिकांश प्रत्याशी लोधी बिरादरी के ही विजयी होते रहे। इस बार प्रमुख दल स्थानीय नेताओं को तरजीह देते हैं या बाहरी प्रत्याशी पर ही दांव लगाते हैं, यह देखने लायक होगा।
इन स्थानीय नेताओं ने लड़ा था चुनाव: चरखारी विधानसभा में वर्ष 2002 के चुनाव में चरखारी निवासी स्थानीय प्रत्याशी अमन लाल राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से चुनाव लड़े और चौथे स्थान पर रहे। वर्ष 2007 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े भटेवरा निवासी कमलेश कुुुमार चौथे स्थान पर रहे।
वर्ष 2012 के चुुनाव में कांग्रेस से प्रत्याशी कोटरा पनवाड़ी निवासी रामजीवन यादव तीसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2017 में मुढ़ारी निवासी जितेंद्र मिश्रा बसपा से चुनाव लड़े और तीसरे स्थान पर रहे।
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