महोबा। अब यूनिट ब्लड से तीन लोगों की जान बचाई जा सकेगी। इसके लिए तीमारदारों को निजी ब्लड बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिला अस्पताल में एक करोड़ की लागत से ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का संचालन शुरू होगा। अब लाईसेंस का इंतजार है।
एक यूनिट ब्लड में रेड ब्लड सेल, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और डब्ल्यूबीसी होती है। मरीज को आवश्यकतानुसार होल ब्लड, प्लेटलेट्स, और प्लाज्मा की जरूरत होती है। ब्लड यूनिट से इनको ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन से किया जाता है। यूनिट न होने की वजह से अभी तक जिला अस्पताल में एक यूनिट खून एक ही मरीज को चढ़ाया जा रहा है। इससे ब्लड बैंक में रक्त की कमी हो जाती है। अब यूनिट तैयार होने से एक यूनिट रक्त से तीन मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।
यूनिट बनकर तैयार हो गई है। एक करोड़ से अधिक की लागत से भेजी गई मशीनों को स्थापित कराया जा रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने बताया कि व्यक्ति में खून की कमी होने पर रेड सेल, डेंगू या अत्यधिक रक्तस्राव होने पर प्लेट्लेट्स और लिवर व आग में जलने वाले मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया जाता है। यूनिट शुरू होने पर एक यूनिट खून से तीन लोगों की जान बचाई जा सकेगी। यूनिट तैयार हो गई है। सभी मानक पूरे करके रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। लाइसेंस मिलते ही संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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बढ़ जाएगी ब्लड स्टोरेज की वैधता
महोबा। यूनिट शुरू होने पर ब्लड से रेड सेल, प्लेट्लेट्स और प्लाज्मा अलग होने पर खून की वैधता एक सप्ताह बढ़ जाएगी। खून को 35 दिन की बजाय 42 दिन तक स्टोर किया जा सकेगा। इसके अलावा ब्लड से तैयार किया गया प्लाज्मा एक साल तक स्टोर किया जा सकता है।
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यूनिट में लगेगा -40 व -80 डिग्री का फ्रीजर
महोबा। यूनिट में ब्लड को स्टोरेज करने के लिए -40 और -80 डिग्री का फ्रीजर लगाया जाएगा। यूनिट में लगने वाले सभी उपकरण व मशीन शासन स्तर से उपलब्ध कराई गई है। यूनिट के संचालन के लिए चिकित्सक और लैब टैक्नीशियन को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।