महोबा। अब टीबी की जांच ‘फील्डी’ ऐप से हो सकेगी। इसके लिए आपको 10 से 20 सेकेंड तक अ...ई...ऊ...खांसी की आवाज रिकार्ड करनी होगी। यह प्रक्रिया आठ बार दोहराई जाएगी। इस ऐप से बिना बलगम के ही टीबी का पता चल जाएगा। एडवांस नैनो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर टीबी कफ कलेक्शन ऐप फील्डी को तैयार किया गया है।
देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने को लेकर लगातार हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब महज खांसने की आवाज से टीबी की पहचान की जा सकेगी। इसके लिए सेंट्रल टीबी डिवीजन की ओर से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। जनपद में ‘फील्डी’ एप की सहायता से घर-घर जाकर टीबी के बिना लक्षण वाले, लक्षण सहित व्यक्तियों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों या रिश्तेदारों की आवाज के सैंपल एकत्रित किए गए हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जी आर रत्मेले ने बताया कि तीन हफ्ते से ज्यादा किसी को खांसी रहने पर उसमें टीबी संभावित माना जाता है। संबंधित व्यक्ति को टीबी है या नहीं यह बगैर बलगम की जांच के पता नहीं लग सकता था। इसलिए सेंट्रल टीबी डिवीजन ने खांसी के तरीके से संभावित मरीज की पहचान के लिए स्टडी शुरू की है। कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सोल्यूशन टू डिटेक्ट टीबी के लिए महोबा से 22 आवाज के सैंपल भेजे गए हैं।
जिला कार्यक्रम समन्वयक नरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक जनपद को मिले लक्ष्य के अनुसार 22 सैंपल शुक्रवार तक लिए जा चुके हैं जिनमें टीबी के मरीज, संभावित और संपर्क में रहे लोगों की आवाज के सैंपल लिए गए हैं। इसमें टीबी रोगियों और जिन्हें टीबी नहीं है उनके भी सैंपल लिए गए हैं।
सात साल से अधिक के बच्चों की रिकॉर्ड हो रही आवाज :
डॉ. रत्मेले के मुताबिक सात साल से अधिक उम्र के टीबी मरीजों, संभावित और संपर्क में रहे लोगों की ही आवाज रिकॉर्डिंग की गई है। ऐप में आवाज रिकॉर्ड करने से पहले संबंधित व्यक्ति, मरीज का पूरा डाटा भरा जाता है। इसके बाद अलग-अलग चार चरणों में रिकॉर्डिंग होती है। पहला, एक से दस तक गिनती, दूसरा, खांसी की आवाज, तीसरा आ, ई, ऊ तीन शब्दों को तीन-तीन बार बोलने, चौथा रिकॉर्डिंग के दौरान बैकग्राउंड आवाज रिकॉर्ड की जा रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से टीबी के मरीज खोजने की होगी स्टडी
जिला कार्यक्रम समन्वयक के अनुसार इस प्रोजेक्ट का मकसद मोबाइल ऐप (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के जरिए महज खांसी की आवाज से संभावित मरीज की पहचान करना है। कई बार लोग लंबे समय तक खांसी आने के बावजूद डर व संकोच के चलते जांच नहीं कराते हैं, वह खुद ही मोबाइल में एप इंस्टाल कर अपनी जांच कर सकेंगे।