खन्ना (महोबा)। सिरसीकलां गांव में बीती 17 फरवरी को विदाई कार्यक्रम के दौरान सिलिंडर फटने से झुलसी सातवीं व आखिरी महिला ने भी शुक्रवार को दम तोड़ दिया। शुक्रवार को नवविवाहित अंजलि की मां की मौत की खबर घर आते ही एक बार फिर से चीख-पुकार मच गई। एक ही हादसे में एक ही परिवार की सात महिलाएं झुलसी और उनमें से एक-एक कर सभी की मौत हो गई।
घटना से न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि समूचे गांव में गम का माहौल है। हादसे के बाद भी किसी ने नहीं सोचा था कि चपेट में आने वाली एक भी महिला जीवित नहीं बचेगी और सभी हमेशा के लिए अपनों का साथ छोड़ जाएंगी। लेखपाल ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया और प्रशासन से हर संभव मदद दिलाने की बात कही।
मालूम हो कि मौजा सिरसीकलां निवासी स्व. मुन्ना श्रीवास की पुत्री अंजलि की शादी के बाद पहली विदा के दौरान रिश्तेदारों के लिए भोजन तैयार हो रहा था। तभी तेज धमाके के साथ छोटा गैस सिलिंडर फटने से नवविवाहिता समेत सात महिलाएं झुलस गईं थीं। जिनका इलाज झांसी में चल रहा था। पांच दिन के अंतराल में छह महिलाओं की मौत इलाज के दौरान हो गई।
जिनमें नवविवाहिता अंजलि, उसकी दादी जमुनिया, चाची सुधा, प्रेमा, सुशीला व सुकीर्तिन के बाद शुक्रवार को नवविवाहिता की मां बिट्टन की भी दिल्ली में इलाज दौरान मौत हो गई। एक ही परिवार की सात महिलाओं की मौत होने से पूरे गांव में गम का माहौल है।
पिता, बहन के बाद मां का भी साथ छूटा
बिट्टन की मौत से उसके इकलौते बेटे गुलशन को रो-रोकर बुरा हाल है। पिता की पंदरह साल पहले ही मौत हो चुकी थी और 17 फरवरी के हादसे ने मां व बहन का साथ भी हमेशा के लिए छीन लिया। ग्रामीण गुलशन को पूरे दिन सीने से लगाकर ढांढस बंधाते रहे।
- चीखों ने छीनीं रातों की नींद
ग्रामीणों ने बताया कि जब से हादसा हुआ है, वे चैन से सो नहीं सके हैं। रोजाना ही हादसे की शिकार हुई किसी न किसी महिला की मौत से कोई न कोई घर चीखों से गूंज रहा है। ऐसे में भला किसे नींद आ सकेगी। किसी ने नहीं सोचा था कि गांव ऐसे हादसे का भी सामना करना पड़ेगा।
- कब किसने तोड़ा दम
21 फरवरी को मेडिकल कॉलेज झांसी में उपचार दौरान नवविवाहिता अंजलि की दादी जमुनिया की मौत हो गई थी। इसके बाद 22 फरवरी को नवविवाहिता अंजलि व उसकी दो चाची प्रेमा और सुधा की झांसी में मौत हो गई। 23 फरवरी को परिवार की ही सुशीला की झांसी में उपचार दौरान मौत हो गई। 24 फरवरी को सुकीर्तिन की मौत हो गई थी और शुक्रवार 25 फरवरी को नवविवाहिता की मां बिट्टन ने दिल्ली में दम तोड़ दिया।
रिफिलिंग को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश
कस्बे की कुछ दुकानों में अवैध गैस रिफिलिंग धंधा चल रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है। इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी खुलेआम एलपीजी गैस की कालाबाजारी खत्म नहीं हुई है। दुकानदार अपने-अपने घरों में भी 10 से 20 गैस सिलिंडर रखे हुए हैं। रामकुमार, रामनाथ, रामअवतार, शिवकुमार, रामबरन आदि लोगों का कहना है ग्रामीणों में सालों तक हादसे की दहशत खत्म नहीं होगी। -