महोबा। मौनी अमावस्या पर मंगलवार को भक्तों ने गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि ऐतिहासिक गोरखगिरि की परिक्रमा लगाई। परिक्रमा में शामिल भक्त जय श्रीराम व गुरु गोरखनाथ के जयकारे लगाते चलते रहे। परिक्रमा के समापन पर कोरोना महामारी से निजात की प्रार्थना की गई।
परिक्रमा समिति के प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी व बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि माघ मास की अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहते हैं। गोरखगिरि धाम की परिक्रमा लगाना उतना ही फलदायी है, जितना चित्रकूट की कामदगिरि की परिक्रमा है। प्रभु श्रीराम के आगमन की गवाही देते गोरखगिरि के ऊपर गोरखेश्वर महादेव, सिद्ध बाबा, संकटा माता, बाबा नागराज, बड़ी चंडिका देवी मौजूद हैं तो पर्वत के चारों ओर पठवा के बाल हनुमान, महावीरन, कबीर आश्रम, सकरे सन्या माता, भूतनाथ आश्रम, काली माता, शनिदेव, राधा-कृष्ण, छोटी चंडिका मैया, नागौरिया, सुनरा सुनरिया व काल भैरव जैसे हजारों वर्ष पुराने दर्जनों मंदिर हैं।
परिक्रमा सुबह 6 बजे आठवें चंदेल नरेश धंग द्वारा 10वीं शताब्दी में निर्मित शिवतांडव मंदिर से शुरू हुई। पांच किमी दूरी तय करते हुए भक्त शिवतांडव पहुंचे। इस मौके पर हिंदू जागरण मंच के प्रदेश संगठन मंत्री राजेश पांडेय, गोरखगिरि परिषद के अध्यक्ष गया प्रसाद, अवधेश गुप्ता, दिनेश खरे, प्रहलाद पुरवार, राम किशन सेन, अवधेश तिवारी व पंकज चौरसिया समेत तमाम लोग मौजूद रहे।