चरखारी (महोबा)। चरखारी ब्लाक की ग्राम पंचायत गौरहारी के अनुसूचित जाति के ग्राम प्रधान को ब्लॉक कार्यालय के कक्ष में बंधक बनाकर पूर्व प्रधान व उसके साथी ने दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए धमकी दी कि यदि पंचायत के हर काम में पैसा नहीं दिया तो जान से मार देंगे। इसके बाद दोबारा चुनाव होगा। पीड़ित प्रधान की तहरीर पर पुलिस ने पूर्व प्रधान समेत दो लोगों के खिलाफ एससीएसटी एक्ट व अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ग्राम पंचायत गौरहारी के प्रधान खलक सिंह ने बताया कि तीन जनवरी की शाम करीब चार बजे वह चरखारी ब्लाक में सरकारी काम से गए थे। उसी दौरान पूर्व प्रधान राजू राजपूत साथी भूपेंद्र के साथ ब्लॉक पहुंच गया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज करने लगा। ग्राम प्रधान का आरोप है कि पूर्व प्रधान ने पंचायत के हर काम में रुपये देने की मांग की। न दने पर जान से मारने की धमकी दी, ताकि दोबारा चुनाव हो सके। गाली-गलौज से मना करने पर पूर्व प्रधान ने साथी के साथ मिलकर उसे ब्लॉक कार्यालय के एक कमरे में बंधक बना लिया। ब्लॉक में मौजूद कर्मचारियों ने बंधक मुक्त कराते हुए बीच-बचाव कराया। उसके बाद आरोपी दो लाख रुपये की रंगदारी न देने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मौके से भाग गए। ग्राम प्रधान ने बताया कि पूर्व प्रधान पर पहले से सरकारी धन के गबन का मामला दर्ज है। खलक सिंह की तहरीर पर चरखारी थाने में पूर्व प्रधान राजू राजपूत व भूपेंद्र के खिलाफ बंधक बनाने, जबरन वसूली का दबाव बनाने, गाली-गलौज, धमकी व एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोतवाली प्रभारी शशि कुमार पांडेय का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
विकासखंड कबरई की ग्राम पंचायत नथूपुरा की महिला ग्राम प्रधान दो जून 2021 को पंचायत भवन में अफसरों के साथ ऑनलाइन बैठक में जुड़ी थी। उसी दौरान 10 से अधिक लोग पंचायत भवन पहुंच गए थे। उन लोगों ने अभद्रता और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए महिला प्रधान को कुर्सी से उठा दिया था।
अधूरा रह गया अलखराम के घोड़ी चढ़ने का ख्वाब
पनवाड़ी ब्लाक के माधवगंज गांव निवाली अनुसूचित जाति के युवक अलखराम के घोड़ी चढ़ने को लेकर खूब हो हल्ला हुआ। अलखराम ने घोड़ी चढ़ने पर जान का खतरा बताया था। मामला चर्चा में आने के बाद प्रशासन ने मंगेतर को नाबालिग करार दे दिया था। इससे उसका ख्वाब अधूरा रह गया। अब लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल होने से यह इंतजार और लंबा हो गया है।