महोबा। अब प्रवासी मजदूरों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। प्रवासी श्रमिकों ट्रक व अन्य वाहनों के चालकों ने अपने वाहनों में बैठना बंद कर दिया है। मजदूरों की हालत देखकर अगर ट्रक चालक बैठा भी लेते हैं, तो उन्हें रास्ते में छोड़कर भाग जाते हैं। इससे श्रमिक एक बार फिर घरों के लिए पैदल चलने के लिए बेबस हो रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चों को गोद में और सिर पर सामान की पोटली लेकर श्रमिक तेज धूप में अभी भी पैदल घरों की तरफ जा रहे हैं।
प्रदेश के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने रात में श्रमिकों को बैठाने वाले ट्रक व माल वाहक वाहनों के चालकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद से रात में श्रमिकों को वाहन चालकों को अपने वाहन में लेकर आना बंद कर दिया है। बुजुर्ग श्रमिकों और महिलाओं के गिड़गिड़ाने पर वाहन चालक उन्हें बैठा तो लेते हैं, लेकिन पुलिस के डर से रात होने से पहले ही रास्ते में छोड़ देते हैं। इससे श्रमिकों को पैदल यात्रा करना पड़ रहा है। यूपी-एमपी के बॉर्डर बगरौनी और कैमाहा में हजारों की संख्या में लोग ट्रकों व अन्य वाहनों से आते थे। अब श्रमिक कैमाहा बॉर्डर तक पैदल पहुंच रहे हैं। इससे उन्हें लू और तेज धूप से जूझना पड़ रहा हैं। सिर पर बोझ और गोद में बच्चे लिए पैदल चल रही महिलाओं को देखकर लोगों के दिल दहल जाते हैं।
कैमाहा बॉर्डर में श्रमिकों की जांच के बाद उन्हें जिला प्रशासन द्वारा बसों से घर भेजा जा रहा हैं। इससे श्रमिक राहत महसूस कर रहे हैं। कौशांबी निवासी श्रमिक रमेशचंद्र, हीरालाल कहते हैं कि नवी मुंबई से एक सप्ताह पहले घर के लिए निकले थे। ट्रक से जिला चंद्रपुर तक आने के बाद 200 किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। इसके बाद ट्रक चालक ने उसकी हालत देखकर बैठा लिया और छतरपुर तक ले आया। वहां से 27 किलोमीटर पैदल चलकर कैमाहा बॉर्डर आए। अब बस मिलने से राहत मिली हैं।
प्रवासी श्रमिकों से भरी रोडवेज बसों के आगे यूपी 112 की गाड़ी चल रही हैं, जो अपने-अपने थानों की सीमा तक ले जाती हैं। उसके बाद दूसरे थाने की यूपी 112 आगे तक ले जाती हैं। इसी तरह पुलिस की निगरानी में श्रमिकों को उनके घर तक भेजा जा रहा है। इन सड़क दुुर्घटनाओं पर भी रोक लग रही हैं।