महोबा। शहर के ऐतिहासिक मदन सागर में पर्यटन विकास के लिए स्थापित किया गया पैंटून पुल दोबारा शुरू होने से पहले ही बह गया। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते यह पुल खखरामठ से हटकर करीब 150 मीटर दूर मझारी दीप के पास पहुंच गया है। लाखों की लागत से बनाए गए इस पुल की देखरेख न होने से जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े गए हैं।
मदन सागर तालाब शहर की शान है। इस तालाब का निर्माण चंदेल शासक मदन वर्मन ने 1128-1164 ईसवी के बीच कराया था। यह तालाब शहर के दक्षिण में स्थित है। तालाब के बीच में खखरामठ बना हुआ है। चार साल पहले तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार ने खखरामठ तक पहुंचने के लिए 340 मीटर लंबा पैंटून पुल तैयार कराया था। पुल में कई ब्लॉक बनाए गए थे तब यहां बड़ी संख्या में सैर करने के लिए लोग पहुंचते थे।
उनके स्थानांतरण के बाद देखरेख के अभाव में यह पुल बंद हो गया था। दो माह पहले डीएम गजल भारद्वाज ने मदन सागर व पैंटून पुल का निरीक्षण किया था। डीएम ने तालाब की सफाई व पैंटून पुल का संचालन कराए जाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद पुल का संचालन दोबारा शुरू नहीं हो सका। बारिश के मौसम में मदन सागर तालाब का जलस्तर बढ़ गया और इसी बीच पैंटून पुल बह गया।
प्रशासनिक लापरवाही से बहा पुल
महोबा। समाजसेवी तारा पाटकर का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते पुल बह गया है। पुल के नीचे के पटरे गायब हो गए और उसमें पकड़ने के लिए लगाए गए स्टील के पाइप चोरी हो गए। यदि जिम्मेदारों ने देखरेख में लापरवाही न बरती होती तो पुल का यह हाल नहीं होता। उन्होंने पुल दुरुस्त कराकर इसका संचालन शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। (संवाद)
पुल की रक्षा ही नहीं कर सके जिम्मेदार
महोबा। युवा दिव्यांश हरदया कहते हैं कि मदन सागर तालाब में आने वाले लोगों को खखरामठ तक पहुंचने में पैंटून पुल सेतू का काम करता। लाखों की लागत से बनाए गए पुल की रक्षा जिम्मेदार नहीं कर सके। पैंटून पुल को दोबारा सही कराना चाहिए और इसकी देखरेख के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना चाहिए ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को इसका लाभ मिल सके। (संवाद)
तेज पानी के बहाव में पैंटून पुल के ब्लॉक बह गए हैं। यह पुल बांधा नहीं गया था। पुल बहकर खखरामठ से कुछ दूर पहुंच गया है। पुल को तैयार करने वाली कंपनी के कर्मचारियों को बुलाया गया है। पुल को सही कराया जाएगा। -डॉ. चित्रगुप्त श्रीवास्तव, जिला पयर्टन अधिकारी, महोबा।