चरखारी (महोबा)। रियासतकालीन कस्बा चरखारी में चल रहे गोवर्द्धन्नाथजू मेले में बृहस्पतिवार की रात अखिल भारतीय मुशायरा का आयोजन हुआ। जिसमें देश के प्रसिद्ध शायरों ने एक से बढ़कर शायरी, गजल, नज्म पढ़कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। शायरा सबीना अदीब ने हसोंगे बोलोगे दुनिया से दिल लगाओंगे... पेश की। इसके बाद उन्होंने तुम जहां हो मैं वहीं हूं तुम समझते क्यों नहीं, मैं अकेली कुछ नहीं तुम समझते क्यों नहीं... पेश कर समां बांध दिया।
अखिल भारतीय मुशायरा सुनने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जुटी। शायर अज्म शाकरी ने नात-ए-पाक आमदे मुस्तफा पे ये सारा जहां आज खुशियों में किस दरजा मसरूर है... पेश की। इसके बाद स्थानीय शायर फरीद मौदहवी, मकीन कोंचवी, आमिल हबीबी छतरपुर ने अपनी शेर-ओ-शायरी से वाहवाही लूटी। हास्य कवि कामता माखन ने अपनी रचनाओं से लोगों को खूब गुदगुदाया। प्रसिद्ध शायरा हिमांशी बाबरा ने उम्र गुजार दूंगी तेरी याद में... प्रस्तुत की। महोबा के शायर हफीज कमाल ने गजल तूने हर बार मेरी झूठी कसम खाई है, अब तो आजा कि मेरी जान पे बन आई है... को दर्शकों ने खूब सराहा। सबा बलरामपुरी ने तेरे नाज उठाऊं कैसे, मुझे तजुर्बा नहीं है... सुनाई। ग्वालियर के शायर अतुल अजनबी ने कश्तियां डूब रहीं है यहां एक-एक करके और हम खुश है कि पतवार संभाले हैं...प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी।
शायर आदिल रशीद ने प्रेम की बातें करने वाले सुख साधन का साथ दिया, उसने मन का साथ दिया और तूने धन का साथ दिया, शूरवीर है दानवीर है लेकिन फिर भी लज्जित है, कर्ण का इतना दोष था उसने दुर्योधन का साथ दिया... सुना कर सभी भावविभोर कर दिया। हाशिम फिरोजाबादी ने हम हैं बीमार मोहब्बत की दवा लाए हैंं... गजल पेश की। शायर नदीम ने शायरी और गजलों से खूब वाहवाही लूटी। जौहर कानपुरी ने धूप को आजमा रहा हूं मैं, मोम का घर बना रहा हूं मैं, उसको लेकर गया था कांधे पर, खुद को दफना के आ रहा हूं मैं... पेश की। इस मौके पर नबी अहमद खां, पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि रामपाल कुशवाहा, संयोजक मुबाकर हुसैन, डॉ. इफ्तेखार खां आदि मौजूद रहे।
फोटो 21 एचएएमपी 21- शहर के अंदर तीन सवारी बैठाकर जाता बाइक सवार। संवाद
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