उत्तर भारत के मशहूर कजली मेले की पालिका प्रशासन ने सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले में 150 से ज्यादा दुकानें सज गई हैं, इसके अलावा काला जादू, ब्रेकडांस, ड्रैगन, बड़ा बिजली का झूला भी लगा दिया गया है। कजली मेले के पहले दिन जुटने वाली लाखों की भीड़ के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
आठ सदी पुराना सुप्रसिद्ध कजली मेले में लाखों की भीड़ जुटने और अच्छी बिक्री होने के कारण लोकल और दूरदराज के करीब डेढ़ सैकड़ा दुकानदार यहां आकर अपनी दुकानों को सजा लिया है। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन के लिए अलग-अलग जगहों पर दो स्टेज बनाए गए हैं, जहां दिन और रात में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। यही नहीं मेले से पहले ही रिश्तेदारों का लोगों के यहां आना शुरू हो गया है, इसके चलते शनिवार को मेला स्थल पर खासी चहल पहल नजर आ रही है। हवेली दरवाजा मैदान में सुबह से ही स्कूली बच्चों द्वारा ट्रैक्टरों में सजाई जाने वाली झांकियों और हाथी घोड़े पहुंच जाते हैं, जिनका पहले पहुंचने पर सबसे आगे उन्हें जगह दी जाती है। 30 अगस्त को 2:30 बजे हवेली दरवाजा प्रांगण से निकाली जाने वाली शोभायात्रा को कमिश्नर फीता काटकर रवाना करेंगी। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर अन्य जिलों से फोर्स बुला लिया गया है, वहीं सांस्कृतिक मंच के लिए मेला स्थल पर वाटरप्रूफ पंडाल बनाया गया है। 31 अगस्त को होने वाले लोकगीत, दिवारी नृत्य, आल्हा गायन कार्यक्रमों के मुख्य अतिथि पुलिस महानिरीक्षक बांदा ज्ञानेश्वर तिवारी रहेंगे। एक अगस्त को होने वाले कार्यक्रमों के मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश चैतन्य कुमार कुलश्रेष्ठ होंगे। दो अगस्त को शाम सात बजे से कवि सम्मेलन के आयोजन के साथ कार्यक्रमों का समापन किया जाएगा। कवि सम्मेलन में मशहूर कवियों को बुलाया गया है।
वाच टावर से रहेगी अराजक तत्वों पर नजर
कजली मेले में जुटने वाली लाखों की भीड़ पर नजर रखने के लिए लिए प्रशासन ने कीरत सागर तट के अलावा शोभायात्रा मार्ग पर भी वाच टावर बनाए हैं। जहां पर पुलिस कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। वाच टावरों पर पुलिस कर्मी अराजक तत्वों और शरारती लोगों पर भी नजर रखेेंगे। कुल मिलाकर मेला ग्राउंड और मार्ग पर आधा दर्जन वाच टावर बनाए गए हैं। इसके अलावा मेला परिसर में अस्थाई पुलिस चौकी और स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है।
मेहमाननवाजी के लिए जाना जाता है महोबा
महोबा। उत्तर भारत के मशहूर कजली मेले में आने वाले लोगों की जमकर मेहमाननवाजी की जाती है। यही वजह है कि इस महोत्सव के मौके पर हर घर पर मेहमान नजर आते हैं। इतना ही नहीं यहां की महिलाएं कजली मेले में अपने घर पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाने जरूर आती हैं। मेले के समय हर घर के दरवाजों पर चारपाई और तख्त पड़े रहते हैं। जहां पर मेहमानों के साथ घर के लोग भी खुली हवा के बीच लेटते हैं और देर रात तक आल्हा ऊदल की कहानियां एक दूसरे को सुनाते हैं।