महोबा। आल्हा-ऊदल बड़े लड़इया जिन से हार गई तलवार, जा कौ बैरी सुख में सोबे वा के जीवन को धिक्कार....... कुछ इसी बोल के साथ जब आल्हा गायन शुरू हुआ को दर्शकों की भुजाएं फड़क उठी। मौका था आल्हा मंच पर आयोजित आल्हा गायन था। यह आल्हा गायन ऐतिहासिक कीरत सागर के तट पर उसी स्थान पर हुआ जहां 843 साल पहले वीर आल्हा-ऊदल व दिल्ली नरेश के बीच भीषण युद्ध हुआ था। इसमें आल्हा-ऊदल को विजय मिली थी।
आल्हा परिषद की ओर से आयोजित आल्हा गायन का शुभारंभ सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा सिंह पटनाहा ने किया। इसके बाद जनपद झांसी के बबीना से आए आल्हा गायक लल्लू सिंह व आल्हा सम्राट वंशगोपाल यादव ने वाद्य यंत्रों के साथ आल्हा गायन की प्रस्तुतियां दीं तो हजारों की संख्या में मौजूद दर्शकों में वीर रस का संचार हो गया। पानीदार यहां का पानी आग यहां के पानी में... के मध्यम से आल्हा-ऊदल की वीरता व उनके शौर्य का बखान किया गया। इस दौरान आल्हा गायन में विभिन्न लड़ाइयों का वर्णन किया गया। महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, झांसी, उरई समेत विभिन्न जिलों से आए मेला प्रेमियों ने आल्हा गायन का आनंद लिया। आल्हा गायन का सिलसिला रात भर चलता रहा। आल्हा मंच के अध्यक्ष शरद तिवारी दाऊ ने कलाकारों को सम्मानित किया।
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झूलों का लिया आनंद, जमकर की खरीदारी
महोबा। कीरत सागर पर चल रहे ऐतिहासिक कजली मेले में दर्शकों की भारी भीड़ जुटी। शहर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों ने झूलों का आनंद लिया। साथ ही मेला स्थल पर लगी दुकानों से जमकर खरीदारी की। इस दौरान लाठियों की भी जमकर बिक्री हुई। साथ ही लोगों ने घरेलू सामानों की भी खरीदारी की। मेले को लेकर बच्चों में अलग ही उत्साह दिखा। साथ ही चाट व पकवानों का भी आनंद लिया।
फोटो 11 एचएएमपी - 21 मृतक बृजेश का फाइल फोटो। स्त्रोत : परिजन
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