नाती के साथ सीएचसी पहुंचा गंगादीन।
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चरखारी/कबरई। पांच सीएचसी में से कबरई व चरखारी में एंटी रेबीज का इंजेक्शन तक नहीं है। कुत्ते के काटने पर सीएचसी पहुंचने वाले मरीजों को लौटाया जा रहा है। मजबूरी में लोग 20 से 25 किमी दूर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे उनके समय व पैसे की बर्बादी हो रही है।
पागल कुत्ता व भेड़िया के काट लेने पर मरीज को 72 घंटे के अंदर आलर्क निरोधी टीका (रेबीज वैक्सीन) लगवाना जरूरी है। इसके बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रेबीज का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। सीएचसी कबरई में दो माह से एंटी रेबीज इंजेक्शन न होने से मरीज भटक रहे हैं। सीएचसी के अंतर्गत पांच पीएचसी खजुरिया पहरा, श्रीनगर, खन्ना, बिलवई व ग्योड़ी आते हैं। जहां कुत्ते के काटने पर लोगों को जिला अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है।
इसी तरह सीएचसी चरखारी में दस दिन से एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म है। यहां पहुंचने वाले मरीज 25 किलोमीटर दूर महोबा आते हैं। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय का कहना है कि एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन लखनऊ को डिमांड भेजी गई है। आपूर्ति कब तक होगी इस सवाल पर वह कोई जवाब नहीं दे सके। बताया कि वैक्सीन मिलते ही जहां कमी है, वहां भेजी जाएगी। जिला अस्पताल में भरपूर मात्रा में रेबीज के इंजेक्शन उपलबध हैं।
राजेंद्र नगर कबरई निवासी हारून सौदागर कहते हैं कि 23 जून को उन्हें कुत्ते ने काटा था। सीएचसी में एंटी रेबीज इंजेक्शन न होने पर 20 किमी दूर जिला अस्पताल जाकर टीका लगवाया। तीन बार टीका लगवाने के लिए जिला अस्पताल जाने से उनके समय व पैसे की बर्बादी होगी। उन्होंने सीएम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। गांधीनगर कबरई निवासी गंगादीन कुशवाहा बुधवार को अपने नाती हेमंत को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने सीएचसी पहुंचा। बताया कि तीन दिन पहले उसके नाती को कुत्ते ने काट लिया था। उसी दिन से सीएचसी के चक्कर लगा रहा है। आज कर्मचारियों ने रेबीज इंजेक्शन न होने की बात कहकर टरका दिया। अब वह जिला अस्पताल जा रहा है।