महोबा। मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह है। लेकिन संक्रमण काल में और घातक बन सकता है। इसलिए इसे छिपाएं नहीं बल्कि इलाज के लिए आगे आएं। आवेश में आकर लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। यह बातें कबरई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में मानसिक स्वास्थ्य शिविर में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गौरव कुमार सिंह ने कहीं।
जांच में पाया गया कि हर पांचवां व्यक्ति मानसिक रोग का शिकार है। 113 में से 22 लोग शिकार मिले। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर मानसिक स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। जिन्हें उलझन, घबराहट, बेचैनी, नींद न आना, सिर में बहुत दिनों से दर्द होना, भूत-प्रेत, देवी-देवताओं का साया होना, बेहोशी के दौरे आना, नकारात्मक विचार आना जैसी समस्या है तो वह मनोरोग चिकित्सक से मिलकर सलाह लें।
मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता (पीएसडब्ल्यू) प्रेमदास ने कहा कि मानसिक रोग में रोगी की स्मृति हृास, सोच-विचार एवं व्यवहार परिवर्तित हो जाता है। जिससे रोगी की दैनिक क्रियाएं प्रभावित हो जाती हैं। धीरे-धीरे रोगी में गंभीर रूप से मानसिक विकृति आ जाती है। समुचित देखरेख, व्यायाम द्वारा इस रोग से बचा जा सकता है।
शिविर में 100 से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण कराया। इसमें 22 मानसिक रोगी चिह्नित किए गए। मरीजों को निशुल्क दवाइयां व उचित परामर्श दिया गया। इस मौके पर सीएचसी के डॉ. महेश, डॉ. अमित, डॉ. ईश्वरचंद्र, डॉ.नितेश शुक्ला, कम्युनिटी नर्स जसवंत सिंह राणा, अकाउंट मैनेजर मेराज, फार्मासिस्ट महेंद्र कुमार सहित स्टाफ उपस्थित रहे।