चरखारी (महोबा)। बुंदेलखंड के कश्मीर के नाम से प्रसिद्ध झीलों के शहर चरखारी स्थित मंगलगढ़ किले में पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नगर पालिका की ओर से बकायदा इसके लिए लाउडस्पीकर से कस्बे में मुनादी कराई गई है। इससे पर्यटकों में मायूसी व्याप्त है। उधर, ऐतिहासिक धरोहर मंगलगढ़ किला से रक्षा मंत्रालय ने अपना अधिग्रहण छोड़ दिया। जिस पर प्रशासन ने नगर पालिका चरखारी को निगरानी के लिए केयर टेकर की जिम्मेदारी सौंपी है।
दस दिन पहले रक्षा मंत्रालय से अधिकारियों ने तहसील प्रशासन को मंगलगढ़ किला खाली कर दस्तावेज के साथ सौंप दिया था। इसके बाद एसडीएम चरखारी डा. प्रदीप कुमार व पालिका ईओ अमरजीत ने मंगलगढ़ किला का निरीक्षण किया। पिछले एक सप्ताह से स्थानीय और बाहरी सैलानियों की बढ़ी भीड़ को देखते हुए नगर पालिका की ओर से कस्बे में लाउडस्पीकर से मुनादी कराकर मंगलगढ़ किला के मुख्य द्वार पर ताला लगाते हुए आम सैलानियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। रविवार को अवकाश का दिन होने पर किला देखने आए सैलानियों को मायूस होकर लौटना पड़ा। उधर, चरखारी निवासी आफाक सरवर ने बताया कि अमेरिका में रह रहे उनके मित्र व बिहार और झारखंड रह रहे उनके रिश्तेदारों ने भी मंगलगढ़ किला खुलने पर चरखारी आने की उत्सुकता जाहिर की लेकिन बंद किए जाने से उनमें मायूसी है।
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ये है किले का इतिहास
चरखारी। कस्बा चरखारी के ऐतिहासिक किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में महाराजा छत्रसाल के द्वितीय बेटे महाराजा जगतराज ने कराया था। चरखारी रियासत समाप्त होने के बाद यह किला जिला पंचायत हमीरपुर की आधिपत्य में था। उस समय भी पर्यटकों का आवागमन रहा। पिछले 30 वर्षों में रक्षा मंत्रालय के अधिग्रहण में होने पर यहां नागरिकों का प्रवेश प्रतिबंधित था। एक सप्ताह पहले किला में तैनात रक्षा मंत्रालय के जवानों ने अपनी चौकी व सुरक्षा को हटाते हुए किला खाली कर दिया। किला खाली होते ही उसे देखने के लिए पर्यटक पहुंचने लगे लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते फिलहाल किले के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।