महोबा। शहर के एक दंत चिकित्सक के साथ 97 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए ज्यादा रिटर्न का लालच देकर वारदात की गई है। साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
शहर में एक होटल के पास डॉ. सौरभ सेठ की डेंटल क्लीनिक है। डॉ. सौरभ सेठ ने थाना साइबर क्राइम पुलिस को दी तहरीर में बताया है कि 24 मार्च 2025 को व्हाट्सएप कॉल से उन्हें ऑनलाइन ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा मिलने की जानकारी दी गई। इसके लिए एक वेबसाइट पर उनकी आईडी बनवाई गई। 24 मार्च को 10 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रेडिंग में इनवेस्ट किए। अच्छा मुनाफा मिला तो 27 मार्च को 39 हजार, एक अप्रैल को 37 हजार, आठ और 15 अप्रैल को 50-50 हजार, 21 अप्रैल को एक लाख रुपये निवेश किए।
वेबसाइट की ओर से बात करने वाले व्यक्ति ने एक बैंक खाते में ये रुपये डलवाए थे। वहीं, दूसरे बैंक खाते में चार अप्रैल को दो लाख रुपये, 28 अप्रैल को 14 लाख 42 हजार 500 रुपये, सात मई को 27 लाख रुपये, 14 मई को 36 लाख 10 हजार 992 रुपये डलवाए गए। इस राशि का इनवेस्टमेंट भी वेबसाइट पर दिखाया गया और अच्छा ब्याज रिटर्न मिल रहा था।
इसी तरह तीसरे बैंक खाते में 17 मई को 15 लाख रुपये समेत कुल 97 लाख 39 हजार 492 रुपये ट्रांसफर कराए गए। 97 लाख रुपये से अधिक ऑनलाइन ट्रेडिंग में लगाने के बाद फ्रॉड करने वालों ने 29 अगस्त को अपना मोबाइल नंबर बदल दिया। जब उन्होंने मेच्योरिटी राशि ब्याज के साथ वेबसाइट से अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करने की कोशिश की तो यह राशि नहीं निकली। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अंदाजा हुआ। इसके बाद पोर्टल पर शिकायत करते हुए साइबर क्राइम पुलिस को तहरीर दी। साइबर क्राइम थाना प्रभारी फहीम अख्तर का कहना है कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है।
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ज्यादा मुनाफे के लालच में डूब गई रकम
डॉ. सौरभ सेठ ने जब अपनी आईडी से 10 हजार रुपये का निवेश किया तो कुछ दिन बाद राशि बढ़कर 15 हजार रुपये हो गई। इसी तरह से 37 हजार रुपये लगाने के कुछ दिनों बाद 45 हजार रुपये वेबसाइट पर दिखने लगे। उन्होंने इस राशि को अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया। इस तरह से डॉ. सेठ को ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों की बात पर विश्वास हो गया। इसके बाद वह लगातार रुपये ऑनलाइन ट्रेडिंग में लगाते रहे और वेबसाइट भी ज्यादा ब्याज के साथ रकम बढ़ाकर रिटर्न दिखाती रही। इससे लालच और बढ़ा। इसके बाद उन्होंने लाखों रुपये लगाए। वेबसाइट ने इसमें भी अच्छा रिटर्न दिखाया लेकिन वापस रुपये खाते में ट्रांसफर नहीं हुए, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ।