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Mahoba News: जिला अस्पताल को मिली ब्लड कंपोनेंट यूनिट की सौगात

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महोबा। मेडिकल कॉलेजों की तर्ज पर अब जिला अस्पताल की ब्लड बैंक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अब जल्द ही एक यूनिट से एक साथ चार लोगों की जान बचाई जा सकेगी। इसके लिए जिला अस्पताल में बने ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की बिल्डिंग तैयार हो चुकी है। इसमें मशीनों का इंस्टॉलेशन भी करीब-करीब पूरा हो चुका है। सब कुछ ठीकठाक रहा तो अगले माह तक ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेशन यूनिट कार्य करना शुरू कर देगी।
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जिला अस्पताल में तैयार की जा रही ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार करने में करीब 1.15 करोड़ रुपये का बजट खर्च हो रहा है। इसमें करीब 15 लाख रुपये में बिल्डिंग में खर्च आया है जबकि यूनिट से जुड़ी मशीनों की व्यवस्था में एक करोड़ रुपये का बजट खर्च हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से मरीजों को ब्लड की जरूरत आसानी से पूरी होगी। इसको लेकर काफी समय से मांग चल रही आ रही थी। जिस पर अस्पताल प्रशासन ने एक साल पहले ही कवायद शुरू कर दी थी। उच्चाधिकारियों से स्वीकृत मिलने के बाद ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। औषधि विभाग की ओर से भी निरीक्षण किया जा चुका है। शीघ्र ही औषधि विभाग से ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट के संचालन को लाइसेंस जारी किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक में तीन संविदा एलटी व एक तकनीकी सुपरवाइजर तैनात है। नई यूनिट के संचालन को लेकर और स्वास्थ्य विभाग को और भी स्टाफ की जरूरत पड़ेगी।
अभी तक जिला अस्पताल में एक यूनिट ब्लड सिर्फ एक ही मरीज को चढ़ाया जाता था लेकिन ब्लड कंपोनेंट यूनिट का संचालन शुरू होने के बाद एक यूनिट ब्लड को चार भाग में बांटा जाएगा। एक यूनिट ब्लड से आरबीसी, प्लेट्सलेट्स, प्लाजमा व क्रायोप्रेसीपिटेट एक-एक यूनिट तैयार होगी। ऐसे में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर मरीज को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेट्सलेट्स, लीवर के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया जाएगा।
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ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व क्रायोप्रेसीपिटेट। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल लिया जाता है। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट ब्लड से तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी हो सकती है।
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