महोबा। बिजली विभाग ने पिछले चार सालों में उपभोक्ताओं से वसूले बिलों के 22 करोड़ रुपये बैंक में जमा न करोकर हड़पने की जांच के दायरे में कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। चेयरमैन स्तर से चल रही जांच और सोशल आडिट की टीम जिले के डिवीजन कार्यालय के अभिलेखों को सील कर साथ ले गई है।
पिछले चार सालों में की गई वित्तीय अनियमितता की जांच पवार कार्पोरेशन चेयरमैन द्वारा महोबा सहित प्रदेश के अन्य चार जनपदों के डिविजन कार्यालय का कराए जा रहे सोशल आडिट से यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। प्रकरण से जुड़े कई अधिकारी और कर्मियों पर कार्यवाई की तलवार लटक रही है।
उपभोक्ताओं के बिल से वसूले रुपये बैंक में जमा न करने के इस गंभीर मामले में उस दौरान तैनात रहे अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता आर एस गौतम ने बताया कि वर्ष 2000 तक की सोशल आडिट पवार कार्पोरेशन द्वारा गठित टीम ने पूरी कर ली है। डिवीजन कार्यालय में आडिट दौरान अभिलेखो को सील कर टीम साथ ले गई है।